खेती-योग्य जमीन के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर खड़ा है. हमसे आगे अमेरिका है. वहीं देश के भीतर अनाज उत्पादन (crop production in India) की बात करें तो पश्चिम बंगाल चावल के साथ अक्सर ही सबसे आगे रहा.

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कई तरह के अनाज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर लगातार राजनैतिक बहसें हो रही हैं. इस बीच ये बात सामने आई है कि अनाज की पैदावार के मामले में देश दुनिया के अव्वल देशों की श्रेणी में आ चुका है. साल 2020-21 में हमने 298.3 मिलियन टन अनाज उपजाने का टारगेट तय किया, जिसे हम काफी हद तक पूरा कर चुके हैं. वैस अनाज उत्पादन में लगातार आगे बढ़ने के पीछे हमारे यहां खेती योग्य जमीन भी है, जिसके कारण कई राज्य अन्न पैदावार में आगे हैं. सांकेतिक फोटो (pixabay)कई तरह के अनाज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर लगातार राजनैतिक बहसें हो रही हैं. इस बीच ये बात सामने आई है कि अनाज की पैदावार के मामले में देश दुनिया के अव्वल देशों की श्रेणी में आ चुका है. साल 2020-21 में हमने 298.3 मिलियन टन अनाज उपजाने का टारगेट तय किया, जिसे हम काफी हद तक पूरा कर चुके हैं. वैस अनाज उत्पादन में लगातार आगे बढ़ने के पीछे हमारे यहां खेती योग्य जमीन भी है, जिसके कारण कई राज्य अन्न पैदावार में आगे हैं. सांकेतिक फोटो (pixabay)

कई तरह के अनाज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर लगातार राजनैतिक बहसें हो रही हैं. इस बीच ये बात सामने आई है कि अनाज की पैदावार के मामले में देश दुनिया के अव्वल देशों की श्रेणी में आ चुका है. साल 2020-21 में हमने 298.3 मिलियन टन अनाज उपजाने का टारगेट तय किया, जिसे हम काफी हद तक पूरा कर चुके हैं. वैस अनाज उत्पादन में लगातार आगे बढ़ने के पीछे हमारे यहां खेती योग्य जमीन भी है, जिसके कारण कई राज्य अन्न पैदावार में आगे हैं. सांकेतिक फोटो (pixabay)

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हमारे पास लगभग 159.7 मिलियन हेक्टेयर खेती करने लायक जमीन है. ये दुनिया में चुनिंदा मुल्कों के पास ही है. हमसे आगे केवल अमेरिका है जिसके पास 174.45 मिलियन हेक्टेयर उपजाऊ जमीन है. अब बात करें अनाज की पैदावार में कौन सा राज्य कहां है तो पाते हैं कि पश्चिम बंगाल सबसे आगे है. चावल उत्पादन के मामले में ये राज्य काफी आगे है. यहां हर साल लगभग डेढ़ करोड़ मीट्रिक टन चावल का उत्पादन होता है. बता दें कि दुनिया में चावल का कुल सालाना उत्पादन 70 करोड़ मीट्रिक टन है. सांकेतिक फोटो (pixabay)हमारे पास लगभग 159.7 मिलियन हेक्टेयर खेती करने लायक जमीन है. ये दुनिया में चुनिंदा मुल्कों के पास ही है. हमसे आगे केवल अमेरिका है जिसके पास 174.45 मिलियन हेक्टेयर उपजाऊ जमीन है. अब बात करें अनाज की पैदावार में कौन सा राज्य कहां है तो पाते हैं कि पश्चिम बंगाल सबसे आगे है. चावल उत्पादन के मामले में ये राज्य काफी आगे है. यहां हर साल लगभग डेढ़ करोड़ मीट्रिक टन चावल का उत्पादन होता है. बता दें कि दुनिया में चावल का कुल सालाना उत्पादन 70 करोड़ मीट्रिक टन है. सांकेतिक फोटो (pixabay)

हमारे पास लगभग 159.7 मिलियन हेक्टेयर खेती करने लायक जमीन है. ये दुनिया में चुनिंदा मुल्कों के पास ही है. हमसे आगे केवल अमेरिका है जिसके पास 174.45 मिलियन हेक्टेयर उपजाऊ जमीन है. अब बात करें अनाज की पैदावार में कौन सा राज्य कहां है तो पाते हैं कि पश्चिम बंगाल सबसे आगे है. चावल उत्पादन के मामले में ये राज्य काफी आगे है. यहां हर साल लगभग डेढ़ करोड़ मीट्रिक टन चावल का उत्पादन होता है. बता दें कि दुनिया में चावल का कुल सालाना उत्पादन 70 करोड़ मीट्रिक टन है. सांकेतिक फोटो (pixabay)

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बंगाल में चावल के अलावा भी कई तरह की पैदावार होती है. इनमें सब्जियों से लेकर फल भी शामिल हैं. आम, लीची, अन्नानास, अमरूद और संतरा जैसे फल बंगाल में खूब उगाए जाते हैं. वहीं सब्जियों में गोभी, टमाटर, भिंडी, पत्तागोभी और बैंगन की खेती होती है. कई तरह के मसाले जैसे मिर्च, अदरक, लहसुन और हल्दी की भी यहां पैदावार होती है. सांकेतिक फोटो (pixabay)बंगाल में चावल के अलावा भी कई तरह की पैदावार होती है. इनमें सब्जियों से लेकर फल भी शामिल हैं. आम, लीची, अन्नानास, अमरूद और संतरा जैसे फल बंगाल में खूब उगाए जाते हैं. वहीं सब्जियों में गोभी, टमाटर, भिंडी, पत्तागोभी और बैंगन की खेती होती है. कई तरह के मसाले जैसे मिर्च, अदरक, लहसुन और हल्दी की भी यहां पैदावार होती है. सांकेतिक फोटो (pixabay)

बंगाल में चावल के अलावा भी कई तरह की पैदावार होती है. इनमें सब्जियों से लेकर फल भी शामिल हैं. आम, लीची, अन्नानास, अमरूद और संतरा जैसे फल बंगाल में खूब उगाए जाते हैं. वहीं सब्जियों में गोभी, टमाटर, भिंडी, पत्तागोभी और बैंगन की खेती होती है. कई तरह के मसाले जैसे मिर्च, अदरक, लहसुन और हल्दी की भी यहां पैदावार होती है. सांकेतिक फोटो (pixabay)

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बंगाल के बाद नंबर आता है उत्तरप्रदेश का. चावल की पैदावार के मामले में ये राज्य पश्चिम बंगाल के तुरंत बाद खड़ा है. वहीं गेहूं की पैदावार में मामले में हमेशा यही राज्य बाजी मारता रहा. देश के कुल गेहूं उत्पादन का लगभग 35% उत्तरप्रदेश में ही उगाया जाता है. यह फसल पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी भाग में मुख्य रूप से प्रदेश की 96 लाख हेक्टेयर जमीन पर उगाई जाती है. यहां का कुल उत्पादन लगभग 300.010 लाख मीट्रिक टन है. गेहूं और कई दूसरी फसलों के अलावा गन्ने की खेती में भी उत्तरप्रदेश सबसे आगे है. सांकेतिक फोटो (pixabay)बंगाल के बाद नंबर आता है उत्तरप्रदेश का. चावल की पैदावार के मामले में ये राज्य पश्चिम बंगाल के तुरंत बाद खड़ा है. वहीं गेहूं की पैदावार में मामले में हमेशा यही राज्य बाजी मारता रहा. देश के कुल गेहूं उत्पादन का लगभग 35% उत्तरप्रदेश में ही उगाया जाता है. यह फसल पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी भाग में मुख्य रूप से प्रदेश की 96 लाख हेक्टेयर जमीन पर उगाई जाती है. यहां का कुल उत्पादन लगभग 300.010 लाख मीट्रिक टन है. गेहूं और कई दूसरी फसलों के अलावा गन्ने की खेती में भी उत्तरप्रदेश सबसे आगे है. सांकेतिक फोटो (pixabay)

बंगाल के बाद नंबर आता है उत्तरप्रदेश का. चावल की पैदावार के मामले में ये राज्य पश्चिम बंगाल के तुरंत बाद खड़ा है. वहीं गेहूं की पैदावार में मामले में हमेशा यही राज्य बाजी मारता रहा. देश के कुल गेहूं उत्पादन का लगभग 35% उत्तरप्रदेश में ही उगाया जाता है. यह फसल पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी भाग में मुख्य रूप से प्रदेश की 96 लाख हेक्टेयर जमीन पर उगाई जाती है. यहां का कुल उत्पादन लगभग 300.010 लाख मीट्रिक टन है. गेहूं और कई दूसरी फसलों के अलावा गन्ने की खेती में भी उत्तरप्रदेश सबसे आगे है. सांकेतिक फोटो (pixabay)

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अब बात करते हैं पंजाब की, जहां के किसान अभी लगातार चर्चा में हैं. यहां किसान सालाना 110-120 लाख टन चावल का उत्पादन करते हैं. यह पड़ोसी राज्य हरियाणा की तरह गेहूं का भी बड़ा उत्पादक है. पंजाब को देश के सबसे उपजाऊ राज्यों में माना जाता है. हालांकि हाल के सालों में यहां कृषि उत्पादकता कम हुई है, इसके बाद भी ये राज्य अनाज उत्पादन के मामले में तीसरे नंबर पर है. सांकेतिक फोटो (pixabay)अब बात करते हैं पंजाब की, जहां के किसान अभी लगातार चर्चा में हैं. यहां किसान सालाना 110-120 लाख टन चावल का उत्पादन करते हैं. यह पड़ोसी राज्य हरियाणा की तरह गेहूं का भी बड़ा उत्पादक है. पंजाब को देश के सबसे उपजाऊ राज्यों में माना जाता है. हालांकि हाल के सालों में यहां कृषि उत्पादकता कम हुई है, इसके बाद भी ये राज्य अनाज उत्पादन के मामले में तीसरे नंबर पर है. सांकेतिक फोटो (pixabay)

अब बात करते हैं पंजाब की, जहां के किसान अभी लगातार चर्चा में हैं. यहां किसान सालाना 110-120 लाख टन चावल का उत्पादन करते हैं. यह पड़ोसी राज्य हरियाणा की तरह गेहूं का भी बड़ा उत्पादक है. पंजाब को देश के सबसे उपजाऊ राज्यों में माना जाता है. हालांकि हाल के सालों में यहां कृषि उत्पादकता कम हुई है, इसके बाद भी ये राज्य अनाज उत्पादन के मामले में तीसरे नंबर पर है. सांकेतिक फोटो (pixabay)

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खरीफ सीजन के दौरान गुजरात में मुख्य तौर पर मूंगफली, कपास और कैस्टरसीड की ज्यादा खेती होती है और यह राज्य इन तीनों फसलों का सबसे बड़ा उत्पादक भी रहता आया है. वैसे बीते एक दशक में बारिश कम होने का असर खरीफ की खेती पर हुआ. लेकिन इस साल बारिश ठीक हुई. माना जा रहा है कि इससे हर तरह की फसल पहले से बेहतर होगी. सांकेतिक फोटो (pixabay)खरीफ सीजन के दौरान गुजरात में मुख्य तौर पर मूंगफली, कपास और कैस्टरसीड की ज्यादा खेती होती है और यह राज्य इन तीनों फसलों का सबसे बड़ा उत्पादक भी रहता आया है. वैसे बीते एक दशक में बारिश कम होने का असर खरीफ की खेती पर हुआ. लेकिन इस साल बारिश ठीक हुई. माना जा रहा है कि इससे हर तरह की फसल पहले से बेहतर होगी. सांकेतिक फोटो (pixabay)

खरीफ सीजन के दौरान गुजरात में मुख्य तौर पर मूंगफली, कपास और कैस्टरसीड की ज्यादा खेती होती है और यह राज्य इन तीनों फसलों का सबसे बड़ा उत्पादक भी रहता आया है. वैसे बीते एक दशक में बारिश कम होने का असर खरीफ की खेती पर हुआ. लेकिन इस साल बारिश ठीक हुई. माना जा रहा है कि इससे हर तरह की फसल पहले से बेहतर होगी. सांकेतिक फोटो (pixabay)

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अगला राज्य है हरियाणा. ये कृषि उत्पादक राज्यों में सबसे आगे खड़े राज्यों में से है. यहां के लगभग 70% लोग खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं. भारत में हरित क्रांति लाने में भी हरियाणा का बड़ा रोल रहा. यहां पर गेहूं, चावल, गन्ना और सूरजमुखी की खेती होती है. भारत में ये सूरजमुखी की खेती में दूसरे नंबर पर है. खेती के अलावा पशुपालन से जुड़े व्यवसाय में भी ये राज्य आगे है. सांकेतिक फोटो (pixabay)अगला राज्य है हरियाणा. ये कृषि उत्पादक राज्यों में सबसे आगे खड़े राज्यों में से है. यहां के लगभग 70% लोग खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं. भारत में हरित क्रांति लाने में भी हरियाणा का बड़ा रोल रहा. यहां पर गेहूं, चावल, गन्ना और सूरजमुखी की खेती होती है. भारत में ये सूरजमुखी की खेती में दूसरे नंबर पर है. खेती के अलावा पशुपालन से जुड़े व्यवसाय में भी ये राज्य आगे है. सांकेतिक फोटो (pixabay)

अगला राज्य है हरियाणा. ये कृषि उत्पादक राज्यों में सबसे आगे खड़े राज्यों में से है. यहां के लगभग 70% लोग खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं. भारत में हरित क्रांति लाने में भी हरियाणा का बड़ा रोल रहा. यहां पर गेहूं, चावल, गन्ना और सूरजमुखी की खेती होती है. भारत में ये सूरजमुखी की खेती में दूसरे नंबर पर है. खेती के अलावा पशुपालन से जुड़े व्यवसाय में भी ये राज्य आगे है. सांकेतिक फोटो (pixabay)

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इसके बाद मध्यप्रदेश का स्थान है, जो दलहन उत्पादक राज्य है. साथ ही ये सोयाबीन और लहसुन की भी खेती करता है. इसके तुरंत बाद ही असम की बारी आती है. वैसे तो ये राज्य चाय की खेती में नंबर वन है, जहां से देशभर के 52% चाय की पैदावार होती है. लेकिन साल 2020-21 में गेहूं जैसी फसल के मामले में भी ये आगे रहने वाला है. मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट के मुताबिक मिट्टी में नमी इसकी एक वजह रही. सांकेतिक फोटो (pixabay)इसके बाद मध्यप्रदेश का स्थान है, जो दलहन उत्पादक राज्य है. साथ ही ये सोयाबीन और लहसुन की भी खेती करता है. इसके तुरंत बाद ही असम की बारी आती है. वैसे तो ये राज्य चाय की खेती में नंबर वन है, जहां से देशभर के 52% चाय की पैदावार होती है. लेकिन साल 2020-21 में गेहूं जैसी फसल के मामले में भी ये आगे रहने वाला है. मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट के मुताबिक मिट्टी में नमी इसकी एक वजह रही. सांकेतिक फोटो (pixabay)

इसके बाद मध्यप्रदेश का स्थान है, जो दलहन उत्पादक राज्य है. साथ ही ये सोयाबीन और लहसुन की भी खेती करता है. इसके तुरंत बाद ही असम की बारी आती है. वैसे तो ये राज्य चाय की खेती में नंबर वन है, जहां से देशभर के 52% चाय की पैदावार होती है. लेकिन साल 2020-21 में गेहूं जैसी फसल के मामले में भी ये आगे रहने वाला है. मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट के मुताबिक मिट्टी में नमी इसकी एक वजह रही. सांकेतिक फोटो (pixabay)

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वैसे उपजाऊ जमीन के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर होने के बाद भी हम उत्पादकता के मामले में चीन से पीछे हैं. हमारे पास लगभग 159.7 मिलियन हेक्टेयर खेती करने लायक जमीन है, जबकि चीन के पास हमसे काफी कम लगभग 103 मिलियन हेक्टेयर ही हैं. ज्यादा जमीन के बाद भी हमने उपज का अपना टारगेट भी काफी कम रखा हुआ है. साल 2020-21 में हमने 298.3 मिलियन टन अनाज उपजाने का टारगेट तय किया, इसमें भी मुख्यतः चावल और गेहूं हैं. वहीं चीन का टारगेट 347.9 मिलियन टन रहा. सांकेतिक फोटो (pixabay)वैसे उपजाऊ जमीन के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर होने के बाद भी हम उत्पादकता के मामले में चीन से पीछे हैं. हमारे पास लगभग 159.7 मिलियन हेक्टेयर खेती करने लायक जमीन है, जबकि चीन के पास हमसे काफी कम लगभग 103 मिलियन हेक्टेयर ही हैं. ज्यादा जमीन के बाद भी हमने उपज का अपना टारगेट भी काफी कम रखा हुआ है. साल 2020-21 में हमने 298.3 मिलियन टन अनाज उपजाने का टारगेट तय किया, इसमें भी मुख्यतः चावल और गेहूं हैं. वहीं चीन का टारगेट 347.9 मिलियन टन रहा. सांकेतिक फोटो (pixabay)

वैसे उपजाऊ जमीन के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर होने के बाद भी हम उत्पादकता के मामले में चीन से पीछे हैं. हमारे पास लगभग 159.7 मिलियन हेक्टेयर खेती करने लायक जमीन है, जबकि चीन के पास हमसे काफी कम लगभग 103 मिलियन हेक्टेयर ही हैं. ज्यादा जमीन के बाद भी हमने उपज का अपना टारगेट भी काफी कम रखा हुआ है. साल 2020-21 में हमने 298.3 मिलियन टन अनाज उपजाने का टारगेट तय किया, इसमें भी मुख्यतः चावल और गेहूं हैं. वहीं चीन का टारगेट 347.9 मिलियन टन रहा. सांकेतिक फोटो (pixabay)