नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुई झड़प को एक साल पूरा होने को आया है, लेकिन अब तक दोनों देशों के बीच हालात सामान्य नहीं हुए हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि बीती 9 अप्रैल को हुई कमांडर स्तर की बैठक से भी खास नतीजे नहीं मिले. कहा जा रहा है कि चीन ने गोगरा पोस्ट (Gogra Post) और हॉट स्प्रिंग्स (Hot Springs) से अपने जवानों को हटाने से इनकार कर दिया है. साथ ही देपसांग को लेकर भी भारत के हाथ बड़ी सफलता नहीं मिली. दोनों देशों के बीच अब तक 11 बार बैठक हो चुकी हैं.

अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने गोगरा पोस्ट और हॉट स्प्रिंग्स से अपनी सेना हटाने से मना कर दिया है. चीन का यही रुख देपसांग मैदानों को लेकर भी जारी है. रिपोर्ट के अनुसार, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा पोस्ट पर मौजूद पैट्रोलिंग पॉइंट 15 और PP-17A से सेना को हटाने की बात पर चीन 'पहले राजी' हो गया था, लेकिन बाद में 'जगह खाली करने से मना' कर दिया. अखबार के सूत्र बताते हैं कि बीती बातचीत में चीन ने भारत से कहा, 'जो हासिल हुआ है, उससे खुश रहना चाहिए.'

रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल देपसांग मुद्दे को कमांडर स्तर की अगली दौर की 'बातचीत' के लिए रखा गया है. सूत्र बताते हैं 'पूरे संकट के दौरान देपसांग में कुछ भी नहीं हुआ. देपसांग में वे हमारी गश्त को रोकते हैं.' बताया गया है कि चीनी टुकड़ियां हर रोज अपनी गाड़ियों में आती हैं और रास्ता रोकती हैं. सूत्रों के अनुसार, 2013 के बाद से ही भारतीय बल पैट्रोलिंग सीमा तक नहीं जा पा रहे हैं.

रिपोर्ट्स के अनुसार, सूत्र ने बताया देपसांग में 'हमें इस बात पर साफ रहना होगा कि हम LAC को लेकर मजबूत पायदान पर नहीं हैं.' उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को देपसांग में '2013 से और उससे पहले से अब तक भी' ब्लॉक किया जा रहा है. इसमें कहा गया है, 'हम अपनी गश्त की सीमा तक जाने में सक्षम नहीं हैं... हम जाते थे और कुछ बिंदुओं तक पहुंचते थे... यहां कुछ चुने हुए पेट्रोलिंग पॉइंट्स थे, जहां हमारे पास ट्रैक थे. लेकिन 2013 के बाद चीन ने रास्ते बना दिए. उनके पास बेहतर कनेक्टिविटी थी, इसलिए वे गतिविधियां रोकते थे.' बीती फरवरी में पेंगोन्ग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारे और कैलाश रेंज से दोनों देशों की सेनाएं हट गई थीं.