नई दिल्ली:रेलवे बोर्ड (Railway Board) के चेयरमैन वी के यादव (VK Yadav) को बोर्ड का सीईओ (CEO) बनाया गया है. रेलवे के इतिहास में वह इस तरह का पद संभालने वाले पहले व्यक्ति हैं. मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. इससे पहले मंत्रिमंडल ने रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन को मंजूरी दी थी. इसके सदस्यों की संख्या 8 से घटाकर 5 कर दी गई है. बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले साल 24 दिसंबर को रेलवे के संगठनात्मक पुनर्गठन को मंजूरी दी थी. इसके करीब नौ महीने बाद बुधवार को सरकार ने रेलवे बोर्ड मेंबर्स के डेजिगनेशन बदल दिए. आइए जानते हैं वी के यादव के बारे में.

कैबिनेट के फैसले को मंजूरी देते हुए अपॉइंटमेंट कमेटी ऑफ द कैबिनेट (एसीसी) ने बताया कि रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अब सीईओ कहलाएंगे. बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव भारतीय रेलवे के नए सीईओ के रूप में अपना काम जारी रखेंगे.

इन पदों पर रह चुके हैं यादव-आपको बता दें कि विनोद यादव 1980 बैच के इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स हैं. इससे पहले कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने विनोद कुमार यादव के रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के रूप में एक वर्ष के लिए (1 जनवरी, 2020 से प्रभावी) पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दे दी थी.

इसके पहले 1 जनवरी, 2019 को विनोद कुमार यादव को रेलवे बोर्ड के चेयरमैन तथा भारत सरकार के पदेन मुख्य सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था. इसके पूर्व यादव दक्षिण-मध्य रेलवे के महाप्रबंधक के पद पर थे.

अपने कार्यकाल के दौरान विनोद कुमार यादव भारतीय रेल में और प्रतिनियुक्ति पर अन्य संगठनों में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यकारी एवं प्रबंधन के पदों पर रहे हैं. विनोद कुमार यादव उत्तर रेल में मुख्य विद्युत इंजीनियर, नीति-निर्माण/कर्षण वितरण; उत्तर-पूर्वी रेल के लखनऊ मंडल में मंडल रेल प्रबंधक; और उत्तरी रेलवे के दिल्ली मंडल में अवर मंडल रेल प्रबंधक (संचालन) के पदों पर रहे हैं.

इस तरह रहे बाकी पद
यादव को जहां रेलवे बोर्ड का चेयरमैन और सीईओ बनाया गया है वहीं प्रदीप कुमार (इन्फ्रास्ट्रक्चर), पीसी शर्मा (ट्रैक्शन एंड रोलिंग स्टॉक), पीएस मिश्रा को ऑपरेशंस एंड बिजनस डेवलपमेंट और मंजुला रंगराजन (फाइनेंस) को मेंबर बनाया गया है. इस नई व्यवस्था के साथ तीन पद मेंबर (स्टाफ), मेंबर (इंजीनियरिंग) और मेंबर (मटीरियल्स मैनेजमेंट) सरेंडर कर दिए गए हैं. मेंबर (रोलिंग स्टॉक) के पद का इस्तेमाल डायरेक्टर जनरल (एचआर) के पद के सृजन के लिए किया गया है.