नई दिल्ली:आज संसद के मॉनसून सत्र का आखिरी दिन है और मोदी सरकार संशोधन के साथ तीन तलाक बिल राज्यसभा में पेश करेगी। सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि इस बिल को उच्‍च सदन से भी मंजूरी मिल जाए। लिहाजा, भाजपा ने अपने सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है। हालांकि विपक्ष इस बिल को पास कराने की राह में रोड़ा अटकाने की पूरी तैयारी में है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने इस मसले पर विपक्ष से सलाह-मशविरा नहीं किया। इस वजह से आज राज्‍यसभा में हंगामे के आसार है।

आपको बता दें कि इससे पहले गुरुवार को सरकार ने मुस्लिमों में तीन तलाक से जुड़े प्रस्तावित कानून में आरोपी को सुनवाई से पहले जमानत जैसे कुछ संरक्षणात्मक प्रावधानों को मंजूरी दे दी थी।

आइये जानते हैं इस बिल से जुड़ी खास बातें....

1. दरअसल, गुरुवार को केन्द्रीय कैबिनेट ने ‘मुस्लिम विवाह महिला अधिकार संरक्षण विधेयक’ में तीन संशोधनों को मंजूरी दे दी। इस विधेयक को लोकसभा द्वारा मंजूरी दी जा चुकी है। यह राज्यसभा में लंबित है।

2. यह प्रस्तावित कानून ‘‘गैरजमानती’’ बना रहेगा, लेकिन आरोपी जमानत मांगने के लिए सुनवाई से पहले भी मजिस्ट्रेट से गुहार लगा सकते हैं। गैरजमानती कानून के तहत, जमानत पुलिस द्वारा ने में ही नहीं दी जा सकती।

3. सरकार का कहना है कि यह प्रावधान इसलिए जोड़ा गया है ताकि मजिस्ट्रेट ‘पत्नी को सुनने के बाद’ जमानत दे सकें। लेकिन प्रस्तावित कानून में तीन तलाक का अपराध गैरजमानती बना रहेगा।

4. मजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करेंगे कि जमानत केवल तब ही दी जाए जब पति विधेयक के अनुसार पत्नी को मुआवजा देने पर सहमत हो। विधेयक के अनुसार, मुआवजे की राशि मजिस्ट्रेट द्वारा तय की जाएगी।

5. इस बिल में एक अन्य संशोधन यह स्पष्ट करता है कि पुलिस केवल तब प्राथमिकी दर्ज करेगी जब पीड़ित पत्नी, उसके किसी करीबी संबंधी या शादी के बाद उसके रिश्तेदार बने किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस से गुहार लगाई जाती है।

6. सरकार के अनुसार, ‘‘यह इन चिंताओं को दूर करेगा कि कोई पड़ोसी भी प्राथमिकी दर्ज करा सकता है जैसा कि किसी संज्ञेय अपराध के मामले में होता है। यह दुरुपयोग पर लगाम कसेगा।’’

7. तीसरा संशोधन तीन तलाक के अपराध को ‘‘समझौते के योग्य’’ बनाता है। अब मजिस्ट्रेट पति और उसकी पत्नी के बीच विवाद सुलझाने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। समझौते के योग्य अपराध में दोनों पक्षों के पास मामले को वापस लेने की आजादी होती है।

8. प्रस्तावित कानून केवल तलाक-ए-बिद्दत पर ही लागू होगा। इसके तहत पीड़ित महिला अपने और अपने नाबालिग बच्चों के लिए गुजारे भत्ते की मांग को लेकर मजिस्ट्रेट के पास जा सकती है।

9. पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से बच्चों को अपने संरक्षण में रखने की मांग कर सकती है। इस मुद्दे पर अंतिम फैसला मजिस्ट्रेट लेगा।

10. दरअसल, सरकार ने इस कदम से इन चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया कि तीन तलाक की परंपरा को अवैध घोषित करने तथा पति को तीन साल तक की सजा देने वाले इस प्रस्तावित कानून का दुरुपयोग किया जा सकता है।