लंदन:पूरी दुनिया कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण से जूझ रही है. दुनियाभर के साइंटिस्ट कोरोना की वैक्सीन (Vaccine) की खोज में लगे हैं. कुछ जगहों पर वैक्सीन का ट्रायल (trial) भी शुरू हो चुका है. लेकिन अभी तक प्रभावी वैक्सीन मिला नहीं है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या होगा अगर कोरोना की वैक्सीन मिले ही नहीं.

बद से बदतर हालात में अगर वैक्सीन की खोज नहीं की जा सकी तो क्या होगा. इस पर गौर करने की जरूरत हैं. सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर कोरोना की वैक्सीन नहीं मिल पाती है तो हमारे समाज को कोरोना के संक्रमण के साथ ही जीना सीखना होगा.

वैक्सीन नहीं मिली तो कोरोना के साथ ही जीना सीखना होगा
ऐसे हालात में शहरों को धीरे-धीरे खोला जाएगा, कुछ आजादी मिलेगी लेकिन पूर्ण रूप से नहीं. अगर कोरोना की वैक्सीन नहीं मिल पाती है तो कोरोना की टेस्टिंग और फिजिकल ट्रेसिंग हमारी जिंदगी का हिस्सा हो जाएगा. कई देशों में सेल्फ आइसोलेशन भी जिंदगी का हिस्सा हो जाएगा.
वैक्सीन नहीं मिलने की हालत में हो सकता है कि उसका ट्रीटमेंट खोज लिया जाए. लेकिन फिर हर साल महामारी का दौर आएगा और उसकी वजह से पूरी दुनिया में लाखों लोग मरेंगे.

कई देश वैक्सीन के ट्रायल में लगे हैं. लेकिन एक्सपर्ट बता रहे हैं कि इतनी जल्दी कुछ नहीं होने वाला. सीएनएन से बात करते हुए इस मामले पर इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के ग्लोबल हेल्थ के प्रोफेसर डॉक्टर डेविड नबारो कहते हैं कि ऐसे अभी भी कई वायरस हैं, जिनके वैक्सीन की खोज हम नहीं कर पाए हैं. इसलिए हम ये नहीं कह सकते हैं कि वैक्सीन मिल ही जाएगी. अगर मिल भी गई तो उसे कई स्तर के टेस्ट से गुजरना होगा.

कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन मिल जाएगी. क्योंकि एचआईवी और मलेरिया की तरह इसका वायरस ज्यादा तेजी से म्यूटेट नहीं करता.

एचआईवी की वैक्सीन अभी तक नहीं मिल पाई है
हालांकि ऐसा पहले भी हो चुका है कि जब वायरस की कोई वैक्सीन नहीं मिली. इस तरह के एक मामले में 1984 में अमेरिका की स्वास्थ्य मंत्री मार्गरेट हेकलर ने वाशिंगटन की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया था कि वैज्ञानिकों ने एक नए तरह के वायरस की पहचान की. बाद में उस वायरस को एचआईवी नाम मिला.

उस वक्त कहा गया था कि अगले दो वर्षों में इस वायरस की वैक्सीन तैयार कर ली जाएगी. लेकिन दो दशक बीत जाने के बाद और करीब 3 करोड़ 20 लाख लोगों की मौत के बाद भी अब तक एचआईवी की वैक्सीन नहीं खोजी जा सकी है.

एचआईवी से पीड़ित होना अपनेआप मे एक अभिशाप बन गया. किसी भी शख्स के पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही उसकी दुनिया नरक बन जाती है. उसके अपने ही उससे किनारा कर लेते हैं. बाद में मेडिकल जर्नल में इस बात को लेकर लेख भी लिखे गए कि एचआईवी से पीड़ित की जिंदगी ठीक करने के लिए बहुत कुछ किया जाना चाहिए.