वॉशिंगटन, अमेरिका ने ईरान के साथ तीन साल पहले हुए परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को व्हाइट हाउस से टीवी पर दिए गए भाषण में इसका एलान किया। इसके साथ ही उन्होंने ईरान पर फिर से आर्थिक प्रतिबंधों को लागू करने की बात कही। ट्रम्प के इस फैसले को पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गंभीर भूल बताया है। उधर, ईरान ने कहा है कि वह अब यूरेनियम संवर्धन का काम फिर से शुरू करेगा। ज्वाइंट कॉम्प्रेहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) नाम का यह समझौता 2015 में ओबामा प्रशासन के वक्त हुआ था।

ट्रम्प ने कहा- गलतियों से भरा था यह समझौता

- ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हम जानते हैं कि हम ईरान के परमाणु बम को नहीं रोक सकते। सही मायनों में ईरान समझौता गलतियों से भरा हुआ था। इसलिए, मैं आज इस समझौते से अमेरिका को अलग करने का एलान कर रहा हूं।"

- ट्रम्प ने यह भी कहा कि जो भी ईरान की मदद करेगा उसे भी प्रतिबंध झेलना पड़ेगा।

अमेरिका को शक था कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा

- डोनाल्ड ट्रम्प का दावा है कि ईरान उसे मिल रही परमाणु सामग्री का इस्तेमाल हथियार बनाने में कर रहा है। परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल बना रहा है। वह सीरिया, यमन और इराक में शिया लड़ाकों और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को हथियार सप्लाई कर रहा है।

3 से 6 महीने बाद लागू होगा प्रतिबंध
- अमेरिका ने कहा है कि वह ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध फौरन नहीं लगाएगा। इसके लिए वह 90 से 180 दिन इंतजार करेगा। 
- अमेरका का कहना है कि प्रतिबंध उन्हीं उद्योगों पर लगाए जाएंगे जिनका जिक्र 2015 की डील में था। इनमें तेल सेक्टर, विमान निर्यात, कीमती धातु का व्यापार और ईरानी सरकार के अमरीकी डॉलर खरीदने की कोशिश शामिल हैं।

ईरान ने 6 देशों के साथ किया था समझौता

- ईरान ने 2015 में अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक समझौते पर दस्तखत किए थे। 
- इस समझौते के तहत ईरान ने उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई थी।

अमेरिका ने बता दिया कि वह जुबान का पक्का नहीं

- ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा, ''अमेरीका ने बता दिया है कि वह अपनी बात का ही सम्मान नहीं करता। मैंने ईरान के एटॉमिक एनर्जी ऑर्गनाइजेशन को आदेश दिया है कि यूरेनियम के औद्योगिक स्तर पर संवर्धन का काम शुरू करने की तैयारी करे।''

ट्रम्प के फैसले से भारत पर क्या असर पड़ेगा?
- भारत ईरान से कच्चे तेल और इससे बनने वाले दूसरे प्रोडक्ट का बड़ी मात्रा में निर्यात करता है। इस पर असर पड़ सकता है।

- भारत 50 करोड़ डॉलर (करीब 3370 करोड़ रुपए) की लागत से रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माने जाने वाले ईरान के चाबहार पोर्ट को बना रहा है। भारत-अमेरिका के बेहतर होते संबंधों की वजह से ईरान भारत से पूरी तरह दूरी बना सकता है। वह चाबहार पोर्ट को तैयार करने में हो रही देरी की वजह से पहले भी चीन का रुख कर चुका है।

पश्चिम एशिया में टकराव का खतरा बढ़ा

- अमेरिका के इस फैसले से पश्चिम एशिया में टकराव और खतरा बढ़ गया है। तेल आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ी है। इसे देखते हुए ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के मुद्दे पर चर्चा की है।

- बता दें कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ईरान को परमाणु समझौते में बनाए रखने की काफी कोशिश की थी।

फैसले पर किसने क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रम्प:"मेरे लिए यह स्पष्ट है कि हम ईरान के परमाणु बम को नहीं रोक सकते। ईरान समझौता मूल रूप से दोषपूर्ण है। इसलिए , मैं आज ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने की घोषणा कर रहा हूं।"

हसन रूहानी​: "मैंने ईरान परमाणु ऊर्जा संगठन को भविष्य के लिए जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। जरूरी हुआ तो ईरान अगले हफ्ते से ही पहले से भी ज्यादा यूरेनियम संवर्धन करेगा। मैं ट्रम्प के फैसले पर यूरोप, रूस और चीन से बात करूंगा।"

बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री, इजराइल: "इजरायल तेहरान में आतंकवादी शासन के साथ विनाशकारी परमाणु समझौते को नामंजूर करने के राष्ट्रपति ट्रम्प के फैसले का पूरी तरह से समर्थन करता है।"