जेनेवा:अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर से भारत को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। यूएन कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (यूएनसीटीएडी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-चीन के बीच विवाद की वजह से भारत का निर्यात 3.5% तक बढ़ सकता है। सबसे ज्यादा फायदा यूरोपियन यूनियन के देशों को होगा। इन्हें 49.70 लाख करोड़ का अतिरिक्त कारोबार मिलने की संभावना है। जबकि जापान, मैक्सिको और कनाडा को 14.2 लाख करोड़ का कारोबार मिल सकता है। 

टैरिफ बढ़ने से कारोबार दूसरे देशों में जाएगा: रिपोर्ट

  1. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-चीन ने एक दूसरे के माल पर जिस तरह से टैरिफ बढ़ाया है, उसका लाभ सीधे तौर पर दूसरे देशों को मिलेगा। दोनों के बीच चल रही खींचतान से ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, फिलीपींस, पाकिस्तान और वियतनाम का निर्यात बढ़ेगा।  

  2. संस्था की रिपोर्ट ‘द ट्रेड वार्स: द पेन एंड गेन’ में कहा गया है कि दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के टकराव का सबसे ज्यादा फायदा वो देश उठा सकेंगे, जिनकी अर्थव्यवस्था प्रतिस्पर्धी और मजबूत है। ऐसे देश ही चीन और अमेरिकी कंपनियों का विकल्प तैयार कर सकेंगे।  

  3. अमेरिका और चीन के बीच की व्यापार विवाद सुलझ नहीं पा रहा। हालांकि, दिसंबर में दोनों देश इस बात पर सहमत हुए थे कि नए टैरिफ 90 दिनों तक प्रभावी नहीं होंगे। इस दौरान दोनों देश बातचीत के जरिए कोई ऐसा रास्ता तलाश कर सकते हैं, जिससे टकराव को खत्म किया जा सके। 

  4. अमेरिका ने कहा है कि एक मार्च तक समाधान नहीं निकल पाया तो वह चीन के 142 लाख करोड़ के सामान पर टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 25% कर देगा। यूएनसीटीएडी की प्रमुख पामेला कोक-हेमिल्टन का कहना है कि दोनों के बीच टकराव खत्म नहीं होता तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। 

  5. हेमिल्टन का कहना है कि गरीब और छोटे देशों को ट्रेड वॉर जैसी वजहों से ज्यादा झटका लगेगा। ईस्ट एशियन सप्लाई चेन में काम कर रही बहुत सारी कंपनियों को हटना पड़ जाएगा। ईस्ट एशियन प्रोड्यूसर्स को इसकी वजह से 113. 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस उठापटक से पूरी दुनिया प्रभावित होगी।

  6. हेमिल्टन का कहना है कि ट्रेड वॉर की वजह से करंसी की वैल्यू कम होगी। उसके बाद जो स्थिति बनेगी उससे रोजगार घटेंगे।