रेलवे इन दिनों बिना त्योहार के ही वसूली का उत्सव मना रहा है। कोरोना अनलॉक के दौर में उत्तर पश्चिम रेलवे ने 174 ट्रेनें शुरू कीं तो इनमें से कुछ को स्पेशल तो कुछ को फेस्टिवल स्पेशल का नाम देकर चलाया जा रहा है। इनमें से 54 ट्रेनों में 64% तक अधिक किराया लिया जा रहा है।

जबकि ऐसी ट्रेनों में बेसिक किराये का 10%-30% तक अधिक लेने का ही नियम है। एक ट्रेन में रेलवे ने अकेले दिसंबर में 5500 यात्रियों से 20 लाख रु. तक की कमाई की। वह इसलिए कि रेलवे ने नियम बना दिया है कि यात्रा भले 100 किमी की हो, किराया 500 किमी तक का ही देना होगा।

दूरी और सुविधाएं एक जैसी, फिर किराये में इतना अंतर क्यों?

  • जयपुर से हावड़ा : स्पेशल ट्रेन 1500 किमी व फेस्टिवल स्पेशल 1503 किमी चलती है। फेस्टिवल में स्लीपर में 830 रु., थर्ड एसी में 2085 रु. किराया। स्लीपर में 43%, थर्ड एसी से 36% ज्यादा किराया।
  • बीकानेर से जयपुर : बीकानेर से जयपुर जाना है तो ट्रेन संख्या 02495 में किराया बांदीकुई तक का देना होगा। इसमें स्पेशल ट्रेन संख्या 02388 की तुलना में स्लीपर में 62%, थर्ड एसी में 64% अधिक किराया।
  • जोधपुर से मुंबई : कोविड स्पेशल व फेस्टिवल स्पेशल। दूरी 935 किमी। फेस्टिवल स्पेशल के स्लीपर क्लास में 30%, सैकंड एसी में 24% अधिक किराया। यह कोविड स्पेशल से 20 मिनट पहले पहुंचाती है।
  • अजमेर से बांद्रा : फेस्टिवल स्पेशल के स्लीपर क्लास में रेगुलर ट्रेन से 17% व सैकंड एसी में 10% अधिक किराया। यह ट्रेन कोविड स्पेशल ट्रेन से महज 45 किमी की कम दूरी में बांद्रा पहुंचाती है

^मकर संक्रांति, कुंभ और होली जैसे फेस्टिवल तो आने ही वाले हैं, इसलिए इन्हें फेस्टिवल के रूप में ही चलाया जा रहा है, इसमें कुछ गलत नहीं है। जहां अधिक किराया लग रहा है तो ऐसे मामलों की जांच करवा ली जाएगी।

-शशि किरण, मुख्य प्रवक्ता, उत्तर-पश्चिम रेलवे