नाबालिग छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाने वाले एससी-एसटी कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मधुसुदन शर्मा का ट्रांसफर कर दिया गया है. अब वह जयपुर कानून विभाग के संयुक्त सचिव का पद संभालेंगे.आसाराम पिछले 56 महीने यानि करीब 5 साल से न्यायिक हिरासत में था. दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिए जाने के बाद आसाराम को ताउम्र जेल में रहना होगा.

विशेष न्यायालय के न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा ने जोधपुर की सेंट्रल जेल में बने अस्थाई कोर्ट में फैसला सुनाया था. उनके दंडादेश के अनुसार आसाराम उर्फ आसूमल पुत्र थेवरदास उर्फ थेउमल को धारा 370(4), 342, 506, 376(2)(एफ) सपठित धारा 120-बी भारतीय दंड संहिता एवं धारा 23 किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2000 के दंडनीय अपराध के लिए दंडित किया गया.

15 अगस्त 2013 की रात को राजस्थान के जोधपुर स्थित मणाई आश्रम में आसाराम ने पीड़िता नाबालिग के साथ यौन शोषण किया था. लड़की के परिजनों ने 20 अगस्त को दिल्ली के कमला नेहरू बाजार थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी.

आसाराम पर ज़ीरो नंबर की एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसे बाद में जोधपुर ट्रांसफर कर दिया गया था. आसाराम के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 376, 354-ए, 506, 509/34, जेजे एक्ट 23 व 26 और पोक्सो एक्ट की धारा 8 के तहत केस दर्ज हुआ था. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 31 अगस्त की रात को इंदौर स्थित आश्रम से आसाराम को गिरफ्तार कर लिया. आरोप पत्र में 58 गवाह पेश किये गए, जबकि अभियोजन पक्ष की तरफ से 44 गवाहों ने गवाही दी.

11 अप्रैल 2014 से 21 अप्रैल 2014 के दौरान पीड़िता का 12 पेज का बयान दर्ज किया गया. 4 अक्टूबर 2016 को आसाराम के मुल्जिम बयान दर्ज किए गए. 22 नवंबर 2016 से 11 अक्टूबर 2017 तक बचाव पक्ष ने 31 गवाहों के बयान दर्ज कराए. इस मामले में आसाराम को निचली अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक कहीं नही जमानत नहीं मिली.