मुख्यमंत्री गहलोत ने कृषि उपज मण्डी परिसरों में 99 वर्षीय लीज पर आवंटित भू-खण्डों पर निर्धारित समय में निर्माण नहीं कराने पर लगने वाली शास्ति जमा कराने तथा निर्माण की अवधि बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कोविड-19 से उत्पन्न आर्थिक परेशानियों को देखते हुए सरकार के इस निर्णय से ऐसे व्यापारियों को राहत मिलेगी, जो इन भू-खण्डों पर निर्धारित समय सीमा में निर्माण नहीं करा पाए थे।

प्रस्ताव के अनुसार सम्पूर्ण आवंटन राशि जमा कराने वाले यदि किसी व्यापारी के भू-खण्ड पर निर्माण नहीं करने के कारण आवंटन निरस्त हो चुका है तथा इस भू-खण्ड को किसी अन्य को आवंटित नहीं किया गया है तो ऐसे प्रकरणों में 31 मार्च, 2021 तक आवंटन राशि का 25% शास्ति जमा कराने की शर्त के साथ आवंटन बहाल किया जा सकेगा।

इसके लिए व्यापारी को 31 दिसंबर, 2021 तक निर्माण का अंतिम अवसर दिया गया है। इसी के साथ जिन प्रकरणों में निर्माण की अवधि पूरी हो चुकी है तथा सम्पूर्ण आवंटन राशि जमा हो चुकी है लेकिन आवंटन निरस्त नहीं हुआ है उन मामलों में भी यह प्रावधान लागू होंगे।

ऐसे प्रकरण जिनमें 25 प्रतिशत शास्ति जमा कराने के बाद अतिरिक्त निर्माण अवधि में भी निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। वे अब बिना शास्ति के 31 दिसंबर, 2021 तक निर्माण कार्य पूरा कर सकेंगे। निर्माण अवधि की गणना कब्जा एवं टाइप डिजाइन दिए जाने की तिथि से की जाएगी।

ब्याज माफी योजना 31 मार्च तक बढ़ाई
मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के प्रभाव को मद्देनजर रखते हुए राज्य की विभिन्न कृषि उपज मंडी समितियों में मंडी शुल्क, आवंटन शुल्क एवं अन्य बकाया राशि की वसूली एवं प्रकरणों के निस्तारण के दृष्टिगत देय ब्याज पर 75 प्रतिशत ब्याज माफी हेतु “ब्याज माफी योजना’ की अवधि भी 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।