अजब-गजब डेस्क, नन्ही-नन्ही चींटियों की दुनिया अनोखी होती है। इन नन्हे कीटों में आपस में बहुत अच्छा तालमेल होता है। ये एक-दूसरे के साथ बांटकर खाना खाती हैं और मिलकर घर ही नहीं, अपने लिए बड़े-बड़े शहर भी बना लेती हैं, जिसमें बड़े-बड़े घर, अच्छी सड़कें सब कुछ होता है। चींटियां फॉर्मिसिडी परिवार की सदस्य हैं। यह परिवार कीड़ों-मकोड़ों की श्रेणी में शामिल है। वैज्ञानिक मानते हैं, चींटियों का जन्म लगभग 12 करोड़ साल पहले हुआ था। उस समय तक धरती पर फूल वाले पौधों का जन्म हो चुका था। माना जाता है कि उन्हीं दिनों धरती पर डायनासोर भी रहता था। अनुमान लगाया जाता है कि चींटियों की 22 हजार से भी अधिक प्रजातियां हैं, जिनमें से 12,500 से अधिक प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है।

एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में चींटियों की संख्या एक लाख खरब से अधिक है। इनकी बड़ी आबादी जंगलों में रहती है। इनकी आयु कीड़ों-मकोड़ों की श्रेणी में सबसे अधिक होती है। यह 30 वर्ष तक जिंदा रह सकती हैं। चींटियां पत्ते आदि खाती हैं और हमारी तरह ही उन्हें भी सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। चींटियों के पास दो पेट होते हैं। एक पेट का खाना वह अपने खाने के लिए रखती हैं और दूसरे पेट का खाना अपने साथियों के लिए सुरक्षित रखती हैं। एक अनुमान के अनुसार धरती पर जितने जानवर रहते हैं, उन सबके वजन का 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले चींटियों के वजन का है। यह भार धरती पर मौजूद सभी इनसानों के वजन के बराबर है। माना जाता है कि एक इनसान पर 10 लाख से अधिक चींटियां हैं।

इन चींटियों का आकार औसतन 0.75 मिली मीटर से लेकर 52 मिली मीटर के बीच होता है। यानी सबसे छोटी चींटी एक मिली मीटर से भी कम होती है और सबसे बड़ी चींटी का आकार लगभग 2.4 इंच तक पाया गया है। चींटियां खुद से कई गुना अधिक वजन उठा सकती हैं। एक शोध कहता है कि काफी चींटियां अपने से 20 गुना अधिक वजन उठा सकती हैं, वहीं कुछ चींटियां अपने से 50 गुना तक अधिक वजन उठा लेती हैं। चींटियों के घर की मुखिया क्वीन होती है, जो एक बार में हजारों अंडे देती है। पुरुष चींटियों को ड्रोन्स कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है कामचोर। वे क्वीन्स के साथ रहते हैं।

चींटियां नदी की चौड़ी धारा को भी पार कर सकती हैं। इसके लिए वे हजारों की संख्या में समूह बना लेती हैं और क्वीन्स व अंडों को बीच में सुरक्षित रखती हैं। फिर वे पानी में उतरती हैं और तैरते हुए दूसरे किनारे पहुंच जाती हैं। वे अकेले पानी में नहीं तैरतीं। पानी में तैरते हुए अगर पानी की तेज लहर उन्हें अलग करने की कोशिश करे या कोई जीव उन पर हमला करे तो वे अपने समूह में पूरी मजबूती बनाए रखती हैं। भले ही कुछ चींटियां उस जीव का शिकार हो जाएं, बाकी चींटियां अपने झुंड में मजबूती बनाए रखती हैं।

चीन की विशाल दीवार दुनिया भर में मशहूर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसे बनाने में लगभग 30 लाख लोगों ने अपना पूरा जीवन लगा दिया। लेकिन क्या तुम अंदाजा लगा सकते हो कि चींटी कितनी बड़ी दीवार खड़ी कर सकती है? दरअसल इसका अंदाजा अब तक कोई नहीं लगा पाया है। चींटियों की दुनिया और उनके शहर का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि अमेरिका में चींटियों के एक घोंसले में तीन दिन तक 10 टन यानी 10 हजार किलोग्राम सीमेंट का घोल डाला गया। एक महीने के बाद उस जगह की सावधानी पूर्वक खुदाई की गई।

चींटियों ने जमीन के अंदर 50 वर्ग मीटर क्षेत्र में आठ मीटर गहराई तक एक विशाल शहर बनाया हुआ था। इस शहर के निर्माण के लिए चींटियों ने 40 हजार किलोग्राम मिट्टी को वहां से बाहर निकाल दिया था और अपने लिए घर, चौड़े रास्ते, पतले रास्ते, हवा की व्यवस्था के लिए जरूरी जगह आदि बना रखी थी। करोड़ों चींटियों ने आपसी तालमेल रखते हुए बड़ी खूबसूरती से अपने इस शहर का निर्माण किया। वैज्ञानिक तो यह भी मानते हैं कि अमेजन के जंगल में चींटियों द्वारा बनाए गए इससे भी बड़े-बड़े शहर हो सकते हैं। वैसे 100 से कम चींटियां भी अपने लिए छोटा घर बना लेती हैं। चींटियों के इस घर यानी घोंसले को कलोनी कहा जाता है।