सीहोर के रफी अहमद किदवई कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में सरकार के सहयोग से देश का पहला और इकलौता चना बैंक स्थापित किया गया है. इस बैंक में चने के दुर्लभ बीज का संग्रहण बड़े वैज्ञानिक तरीके से किया गया है. फिलहाल इस चना बैंक में देश और विदेश के चने की करीब 6 हजार 807 किस्मों का संग्रहण जर्मनी की फ्रीजिंग तकनीक से किया गया है. इन चने के बीजों में कई बीच ऐसे हैं जो वर्तमान में लुप्त हो चुके हैं.

सीहोर के किदवई महाविद्यालय में देश और विदेश की कई संस्थाओं के सहयोग से चने की हजारों किस्मों को सहेजा गया है. इन संरक्षित किस्मों को जर्म प्लाजा कहा गया है. 6 हजार 807 किसमों में 4  हाजर 657 देशी चने के बीच, काबूली चने के 1 हजार 793, गुलाबी चने की 179, काले चने की 104, हरे चने की 74 और विदेशी चने की करीब 1 हजार 807 दुर्लभ किस्में है.

देश के पहले और अनूठे चना बैंक में जर्मन फ्रीजिंग तकनीक के आधार पर कुल 6 यूनिट बनाई गई है. इनमें अलग-अलग डब्बों में 6 डिग्री तापमान पर और 40 प्रतिशत हिमोडिती पर जर्म प्लाजा को सुरक्षित रखा जाता है. इसकी क्षमता 10 हजार जर्म प्लाजा रखने की क्षमता है, जिन्हें कीड़ों से बचाया जा सकता है. चना बैंक के प्रबंधक डॉ. मो. यासीन ने बताया कि इस अनूठे बैंक में रखे काले चने में लोहा बहुतायात में है, लेकिन सीमित और महंगा होने के कारण इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है. इस चने कि किस्में नहीं बनने के कारण इसका उत्पादन नहीं हो रहा है.

चना बैंक को देखने और शोध करने के लिए देश और विदेश के कृषि वैज्ञानिक लगातार आते रहे हैं. इन बीजों से उत्पन्न नई किस्मों के कारण यहां एक एकड़ में 5 किलों से अधिक उत्पादन हो तो प्रदेश में इससे 34 लाख एकड़ में कितनी उपज में बढ़ोत्तरी होगी. आरएके कृषि कॉलेज के डीन डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि यह बीज बैंक देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, मध्यप्रदेश चना उत्पादक जिला है ऐसे में यह चना बैंक किसानों और वैज्ञानिकों के लिए बड़ा महत्वपूर्ण है, इस बैंक की ख्याति देश विदेश में काफी है. यहां विदेशों के वैज्ञानिक लगातार आकर चने के जर्म प्लाजा पर नई खोज करते हैं.