इंटरनेट डेस्क, करवा चौथ के दिन श्री गणेश, मां गौरी और चंद्रमा की पूजा की जाती है। करवा चौथ का व्रत सिर्फ व्रत नहीं है, बल्कि प्रेम, समर्पण और त्याग का महापर्व है। इसके साथ ही करवा चौथ पर कुछ खास चीजों का विशेष महत्व होता है। ये इस प्रकार हैं.....

छलनी का महत्व

करवा चौथ पर महिलाएं पूजा करने के बाद अंत में चंद्र दर्शन छलनी से करती हैं। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। माना जाता है कि वीरवती नाम की महिला विवाह के पहले साल करवाचौथ का व्रत रखती है। भूख के कारण इसकी हालत खराब होने लगी। भाइयों से बहन की यह स्थिति देखी नहीं जा रही थी। इसलिए चांद निकलने से पहले ही एक पेड़ की ओट में छलनी के पीछे दीया रखकर बहन से कहने लगे कि देखो चांद निकल आया है। बहन ने झूठा चांद देखकर व्रत खोल लिया।

इससे वीरवती के पति की मृत्यु हो गई। वीरवती काफी दुखी हुई। उसने हिम्मत नहीं हारी और विश्वास दिखाते हुए अपने पति के मृत शरीर को सुरक्षित अपने पास रखा। अगले वर्ष करवाचौथ के दिन नियम पूर्वक व्रत रखा, जिससे करवामाता प्रसन्न हुई। वीरवती का मृत पति जीवित हो उठा। तब से छलनी परंपरा में आ गई। इसके पीछे एक और रहस्य है कि कोई छल से उनका व्रत भंग न कर दें इसलिए छलनी के जरिए बहुत बारीकी से चंद्रमा के देखकर व्रत खोला जाता है।

करवे का महत्व

मिट्टी के करवा को महिलाएं अपने और पति के संबंध के तौर पर देखती हैं। करवा का अर्थ होता है मिट्टी का बर्तन। व्रत में महिलाएं करवा की पूजा करके करवा माता से प्रार्थना करती हैं कि उनका प्रेम अटूट हो।

सरगी का महत्व

करवाचौथ का व्रत सरगी के बिना अधूरा है। इसमें फल, सूखे मेवे और मिठाई होती है। महिलाएं सूर्योदय होने से पहले जो भोजन करती हैं उसे सरगी कहते हैं। सरगी खाने के बाद महिलाएं पूरा दिन न कुछ खाती हैं न कुछ पीती हैं। सुहागन औरतों को सरगी उनकी सास देती है।

मेहंदी का महत्व

करवाचौथ के दिन सुहागनें अपने हाथों पर पति के नाम की मेहंदी लगाती है। मेहंदी के बिना श्रृंगार अधूरा होता हैं। कहते हैं मेहंदी के रंग से ही पता चलता है कि आपका पति आपसे कितना प्यार करता है।