जयपुर: बिना माल की खरीद किए केवल बिलों से GST कानून में मिलने वाली क्रेडिट का लाभ उठाने वालों का समय अब और खराब होगा। इस माह फर्जी बिलों से करीब 100 करोड़ की GST चोरी मामले की जांच कर रही DGGI इस मामले में अब कड़ाई के मूड में है, जिसके चलते कुछ उद्यमियों को हवालात की हवा भी खानी पड़ सकती है।

दरअसल, GST कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए सक्रिय भारत सरकार की DGGI अब और कड़ाई करने की तैयारी में हैं। केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड और सीमा शुल्क अर्थात CBIC के निर्देशों के बाद DGGI की देशभर में सक्रिय क्षेत्रीय इकाइयां अब पूरा फोकस फर्जी बिलों पर केन्द्रीत कर रही है। DGGI की जयपुर क्षेत्रीय इकाई ने पिछले तीन माह में ऐसे अनेक मामले उजागर किए और फर्जीवाड़ा करने वाले करीब आधा दर्जन लोगों को जेल की हवा भी खिलाई। इसी कड़ी में DGGI ने गत 13 सितम्बर को राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड में 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। 

DGGI की छापेमारी में खास बात यह रही कि DGGI अधिकारियों ने करीब 100 करोड़ की GST चारी पकड़ी और मुख्य आरोपी जयपुर के शास्त्री नगर निवासी मनीष कुमार नरेडी से पहले ही दिन 65.55 करोड़ की राजस्व वसूली की। इसी तरह इस फर्जीवाड़े का लाभ उठाने वाली 8 फर्मों पर भी शिकंजा कसा और इन फर्मों से पहले दिन 4.30 करोड़ और बाद में 17.60 करोड़ रुपए की राजस्व वूसली कर अब तक 87.45 करोड़ रुपए वसूले। बकाया राशि के लिए करदाताओं की मांग पर DGGI अधिकारी 10 अक्टूबर तक इंतजार के मूड में हैं। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। बताया जाता है कि कर चोरी करने वालों से राजस्व वसूली के लिहाज से यह राज्य में अब तक हुई सबसे बड़ी कार्रवाई है।

केन्द्रीय वस्तु व सेवाकर कानून के अनुसार करदाता को माल की खरीद पर चुकाए गए कर की क्रेडिट देने व माल की निकासी में इस क्रेडिट का उपयोग करने के प्रावधान है। GST कानून में माल पर मिलने वाले कर की क्रेडिट का दुरुपयोग करने की दशा में धारा 132 में दण्ड व जुर्माने के प्रावधान भी दिए गए हैं। इस धारा में बिना माल की खरीद के फर्जी बिल का उपयोग करने सहित अन्य तरह से गड़बड़ी करने को भी रेखांकित किया गया है।

DGGI अधिकारियों ने गुप्त सूचनाओं का विश्लेषण व मामले की गहन जांच के बाद फर्जी बिलों का गोरखधंधा करने वाले मनीष नरेडी पर शिंकजा कसा और मामूली कमीशन पर केवल बिल उपलब्ध कराने वाली उसके कर्मचारियों व रिश्तेदारों की फर्मों का पता लगाया। इसके बाद इन बिलों का उपयोग करने वाली फर्मों सहित मनीष के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस मामले में 87.45 करोड़ की वसूली के बाद मनीष व उसके सहयोगियों ने शेष राशि जमा कराने के लिए कुछ समय की मांग की।

अधिकारी फिलहाल उद्यमियों के वादे के मुताबिक शेष बचे 12.55 करोड़ रुपए जमा होने का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि आरोपी उद्यमी पूरा राजस्व समय रहते जमा नहीं कराते हैं तो कोई संदेह नहीं विभाग आगे कार्रवाई करेगा, जिसमें गिरफ्तारियाें से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

उधर, इस मामले में फर्जी बिलों के माध्यम से कथित रूप से क्रेडिट लिए जाने के आरोपों का सामना कर रहे उद्यमी DGGI के खिलाफ ऑफ कैमरा मुखर है। इनका कहना है कि उन्होंने माल की खरीद की, बैंकिंग चैनल से भुगतान किए। इसके बावजूद आपूर्तिकर्ता के फर्जी बिलों में लिप्तता मिलती है तो खरीददार का कहां दोष। खरीददार के पास ऐसा कोई सिस्टम ही नहीं, जिससे वह जांच सके कि आपूर्तिकर्ता ने जो माल खरीदा उसके बिल फर्जी हैं, अथवा असली। ऐसे में उद्यमियों पर दवाब बनाकर उनसे GST की वसूली किया जाना अनुचित है।

बहरहाल, इसमें कोई संदेह नहीं कि फर्जी बिलों से GST कर का लाभ उठाने के गौरखधंधे में कई पेंच फंसे हैं। माल की आपूर्ति कहीं और से और बिल कहीं ओर से लिए जाने की व्यवस्था भारत में दशकों से चल रही है। प्राथमिक दृष्टि से GST कानून का मूल उद्देश्य खरीद-फरोख्त में फर्जीवाड़े को रोकना, कारोबार में पारदर्शिता लाना और कर चोरी पर लगाम लगाना ही है। नरेडी के मामले में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं, उन्हें आधा-अधूरा ही कहा जा सकता है। चूंकि जांच फिलहाल जारी है, अत: उम्मीद यह की जा सकती है कि जांच जल्द ही पूरी होगी व इस फर्जीवाड़े में लिप्त असली गुनहगार दण्डित होंगे।