भोपाल: वन विहार नेशनल पार्क में मादा भालू गुलाबो इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसकी वजह यह कि इसे हाल ही में देश की सबसे बुजुर्ग भालू घोषित किया है। नियमित दिनचर्या इसकी लंबी उम्र का राज है। सबसे उम्रदराज मादा भालू के लिए इसका नाम स्टर्ड बुक में दर्ज किया गया है।

गुलाबो 37 वर्ष की हो चुकी है
वन विहार की डायरेक्टर समीता राजौरा ने बताया कि गुलाबो 37 वर्ष की हो चुकी है। उसका स्वभाव एकदम शांत है। इस स्लॉथ भालू को 6 मई 2006 को भोपाल के मदारियों से रेस्क्यू किया था। उस समय उम्र 25 साल और वजन 90 किलो था।

12 साल से एक जैसा रूटीन
अंसार खान ने बताया कि वन विहार में 26 भालू हैं, जो मदारियों से रेस्क्यू किए गए हैं। गुलाबो को मोतियाबिंद हो गया है, इसके बावजूद उसकी दिनचर्या फिक्स है। सुबह सूरज निकलने के साथ ही बाड़े से निकलकर चारों ओर घूमती है। इसके बाद धूप में बैठती है। फिर पानी के पौंड में जाकर नहाती हैै। सुबह 11 बजे खाने के लिए चिल्लाने लगती है। उसे तरबूज व खजूर बहुत पसंद है।

खाना खाने के बाद हाउसिंग में चली जाती है। दोपहर 3 बजे निकलती है। करीब 2 घंटे तक घूमती है फिर बैठ जाती है। शाम 7 बजे खाना खाकर फिर हाउसिंग में चली जाती है। अंसार ने बताया कि वह 12 साल से उसकी सेवा में है, लेकिन उसे रूटीन बदलते नहीं देखा। भालू के विशेषज्ञ डॉ. अमोल नरवड़े ने बताया कि गुलाबो को कभी बीमार नहीं देखा। ज्यादा उम्र की वजह से उसे सिर्फ ऑर्थराइटिस है।
 

जंगल में 15 से 20 साल जिंदा रहते हैं भालू
भालुओं के लिए काम करने वाली संस्था एसओएस के को-फाउंडर कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि जंगल में भालू की उम्र 15 से 20 साल होती है। कैद यानि कैप्टिविटी में 25 से 30 वर्ष होती है। उन्होंने बताया कि भालुओं के देश में तीन सेंटर है। आगरा में 225, बैंगलूरु में 98 व कश्मीर के एसओएस सेंटर में 15 हिमालयन भालू हैं। इसके अलावा देश के 163 चिड़ियाघरों में 40 से अधिक भालू हैं।
 

सेंट्रल जू अथॉरिटी करता वन्य प्राणियों का इतिहास दर्ज
सेंट्रल जू अथॉरिटी वन्य प्राणियों के इतिहास की जानकारी स्टर्ड बुक में दर्ज करता है। इसकी शुरुआत अंग्रेजों ने बेशकीमती घोड़ों का इतिहास दर्ज करने के लिए की थी। इसके बाद चिड़ियाघर में रह रहे मांसाहारी वन्य प्राणियों लिए किया जाने लगा। इसका प्रकाशन वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया करता है।