जयपुर, राज्य पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ द्वारा की जा रही गतिविधियों का अवलोकन करें तो ये तथ्य निकल कर सामने आते हैं कि गत वित्तीय वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में प्रदेश में पीसीपीएनडीटी एक्ट की प्रभावी पालना, डिकाय आपरेशनों, जन-जागरुकता अभियान की दृष्टि से श्रेष्ठ परिणाम सामने आये हैं। अध्यक्ष राज्य समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एवं मिशन निदेशक एनएचएम नवीन जैन ने शनिवार को पीसीपीएनडीटी एक्ट की पालना, डिकाय आपरेशन एवं डाटर्स आर प्रीसियस अभियान की विस्तार से समीक्षा करते हुये यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि राज्य पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ द्वारा अब तक 109 डिकाय आपरेशन किये गये हैं। डाटर्स आर प्रीसियस अभियान के द्वारा न केवल पीसीपीएनडीटी अधिनियम को सरलीकृत भाषा में युवाओं तक पहुंचाया गया, बल्कि भावनात्मक स्तर पर लोगों से कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध प्रभावी रूप से अपील की गयी। जिसके बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। जैन ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 में चहां 33 डिकाय आपरेशन किये गये वहीं वर्ष 2017-18 में इनकी संख्या बढ़कर 46 तक पहुंच गयी।

उन्होंने बताया कि पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ ने कन्या भ्रूण हत्या में लिप्त लोगों को न केवल गिरफ्तार किया, साथ ही न्यायालयों में बेहतर पैरवी कर यह भी सुनिश्चित किया कि उन्हें किसी भी स्तर पर आसानी से जमानत नहीं मिल सके। इसी का परिणाम था कि डिकाय आपरेशन में पकड़े गये अधिकांश मामलों में आरोपियों को कम से कम 6 से 8 माह तक जेल में बिताना पड़ा है। अध्यक्ष राज्य समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 व 17-18 में सबसे बड़ी बात यह भी रही है कि 200 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 40 चिकित्सक भी शामिल हैं।

आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी पता लगता है कि 25 चिकित्सक राजस्थान से बाहर के राज्यों में इंटरस्टेट डिकाय आपरेशन कर पकड़े गये हैं। उन्होंने बताया कि मई 2016 में राजस्थान का पहला इंटरस्टेट डिकाय आपरेशन किया गया। इन दोनों वर्षों में अब तक 31 इंटरस्टेट डिकाय आपरेशन किये गये। इनमें से सर्वाधिक उत्तरप्रदेश में 11 तथा यहां भी सबसे अधिक आगरा में 6 डिकाय आपरेशन किये गये हैं। आवश्यकता पड़ने पर टीम ने इंटरस्टेट वारंट भी जारी करवाये हैं।

मिशन निदेशक ने बताया कि मुखबिर योजना का शुभारम्भ वर्ष 2009 में हुआ था, लेकिन योजना में व्यावहारिक रूप से बदलाव वर्ष 2015 में किया गया। पूर्व में मुखबिर योजना के तहत केवल मुखबिर को ही पुरस्कार दिया जाता था। परन्तु वर्ष 2015 में योजना में बदलाव करते हुये मुखबिर के साथ डिकाय गर्भवती महिला को 1 लाख रुपये एवं डिकाय महिला के साथ जाने वाली अन्य सहयोगी को भी 50 हजार रुपये तक का पुरस्कार राशि का निर्णय लिया गया।

इस बदलाव को डाटर्स आर प्रीसियस जन-जागरुकता अभियान के माध्यम से आमजन तक साधारण शब्दों में पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि टीम द्वारा प्रेगनेंसी एंड चाईल्ड ट्रेकिंग सिस्टम (पीसीटीएस) साफ्टवेयर में दर्ज आंकड़ों के अनुसार लिंगानुपात का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक किया जाता है, साथ ही इम्पैक्ट साफ्टवेयर में सोनोग्राफी के समय दर्ज होने वाले आंकड़ों में 18 से 35 वर्ष उम्र तक की गर्भवतियों के आंकड़ों का भी गहन विश्लेषण किया जाता है।