नई दिल्ली : केंद्र सरकार जम्मू और कश्मीर जैसे अशांत इलाकों में व्हाट्सऐप कॉलिंग  सेवा रोकने की व्यवहारिकता की समीक्षा करेगी क्योंकि यह पता चला है कि आतंकी सीमा पार बैठे अपने आकाओं से लगातार संपर्क में बने रहने के लिए इस सुविधा का इस्तेमाल करते हैं. इतना ही नहीं घाटी में शांति बिगाड़ने के लिए दहशतगर्द आधुनिक सूचना तकनीक का भी खूब इस्तेमाल कर रहे हैं.

गृह सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस संबंध में मंजूरी दी. बैठक में 2016 में नगरोटा में सेना के शिविर में हुए आतंकी हमले के संबंध में हाल में हुई गिरफ्तारियों का जिक्र किया गया. गिरफ्तार किए गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से कहा कि वे व्हाइटऐप कॉल के जरिये सीमा पार से निर्देश ले रहे थे. इस आतंकी हमले में सात सैन्यकर्मी मारे गए थे. 

हाल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने तीन लोगों हिरासत में लिया, जिन्हें राज्य पुलिस ने आतंकियों की मदद में कथित रूप से संलिप्त होने के लिए गिरफ्तार किया था. बैठक में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और साथ ही सुरक्षा एजेंसियों एवं जम्मू-कश्मीर पुलिस के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए.

बैठक ‘कीपैड जेहादियों’ द्वारा सोशल मीडिया पर डाले गई दुर्भावनापूर्ण सामग्री पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी. ‘कीपैड जेहादी’ अफवाह फैलाकर या किसी घटना को सांप्रदायिक रंग देकर कानून व्यवस्था बिगाड़ने के इरादे से इंटरनेट पर जहर फैलाने का काम करते हैं. 

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि बैठक में आतंकियों से मिलने वाली सुरक्षा चुनौतियों और साथ ही सोशल मीडिया के जरिये चाइल्ड पॉर्नोग्राफी का प्रसार करने वालों लोगों से निपटने के लिए विधि प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा किए जाने वाले कारगर उपायों पर चर्चा की गई.