नई दिल्ली, दूरसंचार आयोग ने मोबाइल कंपनियों की स्पेक्ट्रम रखने की सीमा बढ़ाने के ट्राई के सुझाव से सहमति जतायी है। इससे वित्तीय दबाव में पड़ी दूरसंचार कंपनियों के लिये कारोबार से बाहर निकलने का रास्ता आसान होगा। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने पिछले महीने मोबाइल परिचालकों के लिये निश्चित बैंड में स्पेक्ट्रम रखने की सीमा हटाने की सिफारिश की थी। उसने 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज तथा 900 मेगाहर्ट्ज जैसे ज्यादा अच्छे माने जोने बैंड के स्पेक्ट्रों में एक सर्विल में कुल मिला कर स्पेक्ट्रम रखने की सीमा 50 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया था।

मौजूदा नियम के तहत कोई भी मोबाइल सेवा प्रदाता एक क्षेत्र में कुल आवंटित स्पेक्ट्रम का 25 प्रतिशत तथा किसी खास बैंड के स्पेक्ट्रम के 50 प्रतिशत से अधिक को नहीं रख सकते। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि अंतर मंत्रालयी समिति (आईएमजी) की सिफारिशों के आधार पर दूरसंचार आयोग द्वारा मंजूर दूरसंचार विभाग (डीओटी) राहत पैकेज का मसौदा अंतिम मंजूरी के लिये इस सप्ताह मंत्रिमंडल को भेजेगा।

आईएमजी की सिफारिश के आधार पर दूरसंचार आयोग ने परिचालकों द्वारा नीलामी में खरीदे गये स्पेक्ट्रम के भुगतान के लिये समय अवधि मौजूदा 10 साल से बढ़ाकर 16 साल करने को भी मंजूरी दे दी है। सूत्र के अनुसार उसने दूरसंचार परिचालकों द्वारा जुर्माने पर ब्याज दर में करीब दो प्रति की कमी के बारे में भी आईएमजी की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। साथ ही दूरसंचार आयोग ने स्पेक्ट्रम परियोजना लागत 11,330 करोड़ रुपए बढ़ाकर (11,330 करोड़ रुपए बढ़ाकर) 24,664 करोड़ रुपए करने को भी मंजूरी दी है।