जयपुर, बच्चे के जीवन में सबसे पहले गुरू उसके माॅ और पिता होते है और दूसरा नंबर होता है उसके शिक्षक का, जो शिक्षा बच्चे को अपने माता-पिता से मिलती और जो शिक्षा उसे विद्यालय में टीचर से मिलती हैं वहीं उसके जीवन को सार्थक बनाती है। आज एक ऐसे शिक्षक का जन्मदिन है जिसने ना केवल लोगों को 40 वर्ष तक शिक्षा दी बल्कि उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति के तौर पर देश को आगे बढ़ाया। पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का आज जन्मदिन है और इसी उपल्क्ष में आज शिक्षक दिवस मनाया जाता है। 1962 से हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। गुरु-शिष्य की अनूठी परंपरा के प्रवर्तक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 40 वर्षों तक शिक्षक के रूप में कार्य किया।

जानिए डॉ. सर्वपल्ली का जीवनः
देश के पहले उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुमनी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे किताबें पढ़ने के शौकीन थे। स्वामी विवेकानंद और वीर सावरकर से वह काफी प्रभावित थे। 40 वर्षों तक उन्होंने शिक्षक के रूप में कार्य किया। 1954 में देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से उन्हें सम्मानित किया गया। भारत रत्न, ऑर्डर ऑफ मेरिट, नाइट बैचलर और टेम्पलटन समेत कई सम्मानों से उन्हें नवाजा गया है। 1952 से 1962 के बीच वह देश के उपराष्ट्रपति रहे। 1962 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का कार्यकाल खत्म होने के बाद राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति का पद संभाला।

डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन की वो बातें जो सफलता की कुंजी हुई साबित:

शिक्षक का काम सिर्फ विद्यार्थियों को पढ़ाना ही नहीं है बल्कि पढ़ाते हुए उनका बौद्धिक विकास भी करना है।
शिक्षा मानव और समाज का सबसे बड़ा आधार है।

अच्छा शिक्षक वह है, जो ताउम्र सीखता रहता है और अपने छात्रों से सीखने में भी कोई परहेज नहीं करता हो।

उच्च नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में उताकर उसे आत्मसात करे।

शिक्षक समाज का निर्माता होता है, समाज के निर्माण में उसकी अहम भूमिका होती है। 

कोई भी आजादी तब तक सच्ची  नहीं होती है, जब तक उसे पाने वाले लोगों को विचारों को व्यक्त करने की आजादी न दी जाए।

शिक्षक वह नहीं, जो तथ्यों को छात्रों के दिमाग में जबरन डालने का प्रयास करे, सही मायने में शिक्षक वही है, जो उसे आने वाली चुनौतियों के लिये तैयार करे।

पुस्तकें वह माध्यम हैं, जिनके जरिये विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण किया जा सकता है।

ज्ञान के माध्यम से हमें शक्ति मिलती है, प्रेम के जरिये हमें परिपूर्णता मिलती है।

हमें तकनीकी ज्ञान के अलावा आत्मा की महानता को प्राप्त करना भी जरूरी है।