खेल डेस्क, भारत में पुराने समय से ही गुरु शिष्य की परम्परा रही है, जो आज भी कायम है। गुरु के मार्गदर्शन से शिष्य नई ऊचाइयों को छूता है। यह किसी भी क्षेत्र हो सकता है। खेल की बात करे तो इसमें भी गुरु शिष्य की परम्परा रही है। कई खिलाडिय़ों ने अपने गुरु के मार्गदर्शन में अपने खेल में महारथ हासिल की है। पांच सितम्बर को भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।  

आज हम बताने जा रहे हैं कि कौन-कौन से शिष्यों ने अपने गुरु के नेतृत्व में खेल में उनका नाम रोशन किया। 

रमाकांत आचरेकर-सचिन तेंदुलकर:

खेल में अगर कोई गुरु शिष्य की जोड़ी मशहूर है तो वह है रमाकांत आचरेकर-सचिन तेंदुलकर की है। सचिन ने आचरेकर के मार्गदर्शन में ही क्रिकेट की बड़ी-बड़ी उपलब्धियों को आसानी से प्राप्त कर किया। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट में अपने प्रदर्शन के दम पर आचरेकर का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखवा दिया है। आचरेकर ने भारतीय क्रिकेट टीम को कई बड़े खिलाड़ी दिए हैं। जिनमें विनोद काम्बली और प्रवीण आमरे का नाम भी आता है। 

सतपाल-सुशील:

भारत को ओलंपिक में दो पदक दिलवाने वाले सुशील ने सतपाल से ही कुश्ती की बारीकियां सीखी थी। जिसके दम पर उन्होंने 2012 के लंदन ओलंपिक में रजत पदक और 2008 के बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर देश और अपने गुरु का नाम रोशन किया था। 

राजकुमार-विराट कोहली:

भारतीय कप्तान विराट कोहली की सफलता के पीछे उनके गुरु राजकुमार का सबसे बड़ा हाथ है। उन्हीं से क्रिकेट की बारीकियां सीख कर वह महान खिलाडिय़ों की श्रेणी में शामिल हुए हैं। वह क्रिकेट की नई-नई उपलब्धियों को प्राप्त कर महानता की ओर अग्रसर हो रहे हैं। हाल ही में उन्होंने वनडे में 30वां शतक लगाकर पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग की बराबरी की है।