स्वामी विवेकानंद के बारे में जानकारी लेने के लिए देश-विदेश के लोग नंगली सर्किल के पास सीएमएचओ कार्यालय परिसर में स्थित स्वामी विवेकानंद स्मारक स्थल पर आने लगे हैं। वे यहां स्वामी विवेकानंद से जुड़ा साहित्य पढ़ते हैं और उनसे संबंधित स्थानाें के बारे में जानकारी लेते हैं।

स्मारक स्थल पर रखी विजिटर बुक के मुताबिक 9 सितंबर 2018 से अब तक 3 हजार से ज्यादा लोग यहां पहुंचे हैं। इसमें विदेशी पर्यटकों के अलावा देश के पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात सहित अन्य प्रदेशाें के लाेग शामिल हैं। भारत विकास परिषद के उत्तर-पश्चिम जाेन के संरक्षक डाॅ. केके गुप्ता ने बताया कि भारत विकास परिषद अलवर ट्रस्ट की ओर से इसकी देखरेख कर रहा है। स्मारक बनाने के लिए शहर के संगठनाें ने पूरी लड़ाई लड़ी थी।

कई सालाें के बाद आखिर स्मारक उस स्थान पर बना, जहां कभी स्वामी विवेकानंद ठहरे थे। जनवरी 2018 में इसका निर्माण शुरू हुआ। अप्रैल में बनकर तैयार हुआ। स्वामीजी की मूर्ति लगने के बाद 9 सितंबर 2018 काे इसका उद्घाटन हुआ। यहां वेल्लूर स्थित आश्रम से भी लाेग आए। रामकृष्ण मिशन से जुड़े लाेग भी अलवर आने लगे हैं। डाॅ. गुप्ता ने बताया कि स्मारक बन ताे गया है पर छत से अब ही पानी टपकता है। इस पर आरसीसी की छत डलवाने की आवश्यकता है। साथ ही यहां पानी की समस्या है।

स्वामी विवेकानंद जी का अलवर से जुड़ाव
एडवाेकेट हरिशंकर गाेयल ने बताया कि स्वामी विवेकानंद फरवरी 1891 में अलवर अाए थे। वे स्टेशन से पैदल चलकर सामान्य चिकित्सालय पहुंचे थे। डाॅ. गुरुचरण ने उन्हें अपने यहां ठहराया। यह वही स्थान है, जहां आज सीएमएचओ कार्यालय है। इसके बाद स्वामी विवेकांनद अशाेका टाॅकीज के पास गाेविंद सहाय गुप्ता के मकान में भी ठहरे।

उनका संपर्क गाेविंद सहाय राजपुराेहित, माेहन भाेला पंसारी, पुरुषाेत्तम हलवाई, हरबक्श फाैजदार व शंभूनाथ से भी रहा। वे यहां से पैदल चलकर सरिस्का के जंगलाें से हाेते हुए खेतड़ी पहुंचे थे। गाेविंद सहाय गुप्ता काे स्वामी ने शिकागो से एक पत्र 1894 में लिखा था। यह पत्र उनके पास आज भी है। स्वामी जी दूसरी बार 1897 में अलवर आए थे।