नई दिल्ली:मदरसों को लेकर अक्सर सियासत होती रही है. यह कोई पहला मौका नहीं है जब मदरसों (Madarsa) पर उंगली उठाई जा रही है. मदरसों को कभी आतंक की फैक्ट्री कहा जाता है तो कभी राष्ट्र विरोधी शिक्षा का अड्डा. बीते कुछ साल से तो मदरसों को लव जिहाद (Love Jihad) की पाठशाला भी कहा जाने लगा है. लेकिन मदरसों को लेकर होने वाली सियासत के बीच मदरसों ने यह भी पैगाम दिया है कि अब दुनियावी तालीम भी मदरसों का हिस्सा है.

इसकी एक मिसाल बीते साल अप्रैल में उस वक्त सामने आई थी जब सिविल सर्विस परीक्षा (UPSC) का रिज़ल्ट आया. औरों की तरह से आज़मगढ़ (Azamgarh) के एक मदरसे से पढ़े मौलाना ने यूपीएससी का एग्जाम पास किया था. गौरतलब रहे कि असम में मदरसे और संस्कृत स्कूल (Sanskrit School) बंद किए जाने को लेकर विवाद हो रहा है.

मदरसे से पढ़े शाहिद की आई थी ऑल इंडिया 751 रैंक
बिहार के रहने वाले मौलाना शाहिद रज़ा खान की पढ़ाई आज़मगढ़ के अल जमैतुल अशर्फिया से शुरु हुई. उसके बाद जेएनयू से अरबी और पश्चिम एशिया विषय में पीएचडी की. लेकिन इस दौरान यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस अफसर बनने का ख्वाब भी पलता रहा. और जब मौका आया तो अप्रैल 2019 में शाहिद रज़ा ने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली है. उनकी ऑल इंडिया रैंक 751 आई थी.

3 भाई विदेश में और एक डॉक्टर, पिता सीसीएल बोकारो से रिटायर्ड

शाहिद रज़ा के एक बड़े भाई डॉ. जावेद अली दिल्ली में रहते हैं और तीन भाई अरब देश में नौकरी करते हैं. पिता मुमताज अली सीसीएल, बोकारो में सुपरवाइजर रहे हैं. खास बात यह भी है कि शाहिद ने यूपीएससी की सबसे कठिन यह परीक्षा दूसरी बार में पास की है. शाहिद का मानना है कि किसी को भी रुढ़िवादी नहीं होना चाहिए, खासतौर से पढ़ाने-लिखाने का काम करने वाले संस्थानों को.

यूपीएससी से पहले भी सुर्खियां बन चुके हैं शाहिद

यूपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद शाहिद के लिए यह कोई पहला मौका नहीं था जब वो सुर्खियों में आए थे. इससे पहले 2016 में उस वक्त शाहिद का ज़िक्र हुआ था जब नजीब अहमद जेएनयू के हॉस्टल से गायब हुआ था. नजीब के केस में शाहिद पहले गवाह थे. और खास बात यह है कि आखिर तक मजबूती के साथ शाहिद इस केस में डटे हुए हैं. नजीब केस में जांच एजेंसी दिल्ली पुलिस, एसआईटी और सीबीआई तक को शाहिद अपने बयान दर्ज करा चुके हैं.