नई सड़क स्थित रावत वाटिका में चल रही शिव महापुराण के 5वें दिन सोमवार को कथा वाचक संत कृपाराम महाराज ने शिव विवाह की कथा, कार्तिक व गणेश जन्म का वर्णन करते हुए कहा कि जब व्यक्ति की जिद की एक गांठ छूट जाए तो उलझे हुए सभी रिश्ते सुलझ जाएं व किसी को परेशान देख कर अगर आपकों तकलीफ होती हो तो यकीन मानिए ईश्वर ने आपको इंसान बनाकर कोई गलती नहीं की। उन्होंने कहा कि रिश्ते अंकुरित होते हैं प्रेम से, जिंदा रहते हैं स्वाद से, महसूस होते हैं संवेदनाओं से, जिए जाते हैं दिल से, मुरझा जाते हैं गलत फहमियों से, बिखर जाते हैं अहंकार से। शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है। एक शब्द मन को दुखी कर जाता है दूसरा मन को खुश कर जाता है क्योंकि हमारी वाणी ही हमारे व्यक्तित्व व आचरण का परिचय कराती है। 

संत कृपाराम महाराज ने कहा कि सुख प्राप्त करने के लिए आदमी मकान बदलता है, दुकान बदलता है, कभी-कभी देश बदलता है तो कभी-कभी वेश भी बदलता है लेकिन अपनी सोच व स्वभाव को बदलने को राजी नहीं, भूमि नहीं अपनी भूमिका बदलो, जिस दिन आदमी ने अपना स्वभाव जीत लिया उसी दिन से उसका अभाव मिट जाएगा। गुरु सेवा समिति के सचिव इंद्रकुमार बोहरा ने बताया कि कथा के दौरान विभिन्न प्रसंगों के द्वारा बीच-बीच में भजनों की स्वर लहरियों पर भक्तगण झूम उठे। कथा के दौरान शिव परिवार को दर्शाने वाली मनमोहक झांकियां सजाई गई जो आकर्षण का केंद्र रहीं। नानी बाई के मायरे का वाचन बाल संत बांके बिहारी द्वारा किया जा रहा है जिसकी पूर्णाहुति मंगलवार को होगी।