सिद्धार्थनगर, नेपाल की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में बाढ़ के पानी से 373 गांव चारों ओर से घिर गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार राप्ती, बूढ़ी राप्ती और कूड़ा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालांकि नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है लेकिन सुस्त रफ्तार के कारण जिले में बाढ़ पीडि़तों की मुश्किलें बरकरार है। राप्ती नदी खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर, बूढ़ी राप्ती एक मीटर 25 सेंटीमीटर ऊपर, कूड़ा 50 सेंटीमीटर ऊपर और जमुआर नाले के एक मीटर 30 सेंटीमीटर ऊपर बहने से जिले की पांचों तहसील के 600 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में है।

इससे 373 गांव बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिरे है। नावों की कमी से बाढ़ से घिरे गांव में राहत न पहुंच पाने से बाढ़ पीडि़त जहां फाकाकशी के शिकार हैं वहीं लोग घरों की छतों, बांधों और ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। जिले के 85 हजार बाढ़ पीडि़त परिवारों में से अब तक 31871 परिवारों को राहत मिल पाई है। राहत का काम तेज करने के लिए बाढ़ प्रभावित इलाकों को 35 सेक्टरों में बांट कर राजपत्रित अधिकारियों को सेक्टर प्रभारी बनाया गया है। सूत्रों ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में 47 बाढ़ चौकी, 11 राहत शिविर और 17 वितरण केंद्र काम कर रहे हैं।

इस क्षेत्रों में 235 नाव, 13 मोटर बोट, पीएसी और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम राहत वितरण और बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान बाढ़ से एक और व्यक्ति की मौत हो जाने से जिले में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढक़र 20 हो गई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में संक्रामक बीमारियां फैलने से हजारों लोग इन बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं।