जयपुर. द्वितीय ज्येष्ठ शुल्क षष्ठी-सप्तमी मंगलवार को फिर से शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। अगली 23 जुलाई तक विवाह मंडप सजेंगे। अधिकमास में मांगलिक कार्य नहीं हो सके थे। 13 जून को अधिकमास समाप्त होने के बाद भी पिछले छह दिनों से शुभ मुहूर्तों में बाधकपात व लत्ता दोष होने से विवाह, गृह प्रवेश, जनेऊ, भूमि पूजन जैसे मांगलिक कार्य नहीं हो सके। 21 जुलाई को भड़ल्या नवमी और 23 जुलाई को देवशयनी एकादशी के अबूझ सावे सहित 15 सावे होंगे।

23 जुलाई के बाद 4 माह नहीं होंगे सावे
- 23 जुलाई के देवशयनी एकादशी के अबूझ विवाह मुहूर्त के बाद 4 माह के लिए देवशयन होगा। इसके बाद 19 नवंबर को देवउठनी एकादशी से विवाह, गृहप्रवेश, जनेऊ, भूमि पूजन आदि मांगलिक कार्य हो सकेंगे।

- पं. दिनेश मिश्रा का कहना है कि भगवान विष्णु अनुराधा नक्षत्र के प्रथम चरण में विश्राम करेंगे। श्रवण नक्षत्र के मध्य यानि आगामी 20 सितंबर को करवट लेंगे। रेवती नक्षत्र अंतिम चरण में जागेंगे। इस 4 माह में मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। शास्त्रों में किसी भी मांगलिक कार्य में प्रभु का साक्ष्य होना जरूरी माना गया है।

- पं. प्रो. विनोद शास्त्री का कहना है कि इन 4 माह में चातुर्मास के कारण आसुरी शक्तियां प्रबल और दैवीय शक्तियां निर्बल रहती हैं। इसलिए प्राय: शुभ कार्य नहीं होते हालांकि यह समय अशुभ नहीं माना जाता। इस दौरान लोग भक्ति में रमे रहते हैं।

संयोग : देवशयनी व देवउठनी एकादशी सोमवार को
- इस बार देवशयनी ‌व देवउठनी एकादशी सोमवार को होगी। यह अद्भुत संयोग है। शास्त्रों में विवाह में वर-वधु के मन का मिलन अतिआवश्यक है। सोमवार का स्वामी चंद्र होता है। चंद्र मन का कारक है। विवाह आदि में मन के कारक चंद्र, आत्मा के कारक सूर्य और ज्ञान के कारक गुरु का बल जरूरी है।

कब कौन-सा सावा रहेगा

19 जून 8 रेखीय
20 जून 9 रेखीय
21 जून 8 रेखीय
22 जून 8 रेखीय
23 जून 8 रेखीय
25 जून 8 रेखीय
29 जून 8 रेखीय
1 जुलाई 5 रेखीय
2 जुलाई 7 रेखीय
6 जुलाई 7 रेखीय
7 जुलाई 9 रेखीय
10 जुलाई 7 रेखीय
11 जुलाई 9 रेखीय
21 जुलाई 8 रेखीय