भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कोटा कोर्ट ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक सम्पति अर्जित करने के मामले में एमबीएस अस्पताल के तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी सहित 7 आरोपियों को सात, पांच और तीन साल की सजा सुनाई है. कोर्ट ने सजा के साथ सभी आरोपियों पर कुल 1 करोड़ 25 लाख का भारी जुर्माना भी लगाया है.

सहायक निदेशक अभियोजन एसीबी कोर्ट कोटा एहसान अहमद ने बताया कि वर्ष 2003 में जयपुर एसीबी ने तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरपी शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच की थी. जांच में पाया गया की वर्ष 1982 से 1998 तक डॉ. आरपी शर्मा ने पद का दुरुपयोग कर टीटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के नाम से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर फर्जी निवेश किया. आरोपी ने इसमें अपनी पत्नी डॉ. मोहिनी शर्मा, ससुर तेजकरण शर्मा, सास चंद्रकांता शर्मा सहित गीतांजलि शर्मा, किशन गोपाल और असलम पठान को शामिल कर संपत्ति को अपने कब्जे में रखा. इस अवधि में आरोपी ने 55 लाख 42 हजार 429 रुपये की सम्पति अर्जित की. जांच में पाया गया कि इन्होंने 33 लाख से ज्यादा की आय अवैध रूप से अर्जित की.

इस पर एसीबी ने कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया. गुरुवार को मामले में एसीबी कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी डॉ. आरपी शर्मा और उनकी पत्नी मोहिनी शर्मा को 7-7 साल की सजा व 50-50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया. वहीं डॉ. आरपी शर्मा के ससुर तेजकरण शर्मा एवं सास चंद्रकांत शर्मा को 3-3 साल की सजा व 5-5 लाख रुपए जुर्माना और अन्य तीन आरोपियों को 5-5 साल की सजा व 5-5 लाख के जुर्माने से दंडित किया है. साथ ही अदालत ने टीटी हॉस्पिटल को भी सरकारी कब्जे में लेने के आदेश जारी किए हैं.