जयपुर:किसी भी रिश्ते को दीर्घकाल तक कायम रखने के लिए यह आवश्यक है कि हम यह जानें कि हमारे अंदर ऐसे कौन से गुण हैं जो हमारे साथी हमारे साथ जीवन बिताने पर विवश कर दें। अपना आत्म विश्लेषण कर मैंने पाया कि मेरे अदंर यह निम्न गुण हैं-

ईमानदारी
कर्तव्य, मर्यादा व सत्य का पूर्ण निष्ठा से पालन करना ईमानदारी है। ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है। किसी रिश्ते को दीर्घकाल तक कायम रखने के लिए यह आवश्यक है कि आपसी संबंधों में ईमानदारी रहे। ईमानदार होना लोगों का हम पर विश्वास बनाए रखने में मदद करना है। झूठे लोगों पर कोई जल्दी भरोसा नहीं कर पाता है। ईमानदारी जीवन में हमें सब कुछ उम्मीद के अनुसार देती है। वहीं एक झूठ किसी भी रिश्ते को बर्बाद कर सकता है।
स्पष्टवादिता
किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए यह आवश्यक है कि रिश्ता दिल से निभाया जाए न कि बोझ समझकर। साथी की अगर कोई बात पसंद नहीं है या उसे समझ नहीं पा रहे हैं तो इस डर से कि अगर मैंने कुछ कहा तो दूसरे को बुरा लगेगे ये सोचने के स्िान पर स्पष्ट रूप से अपनी बात कहकर उस समस्या का समाधान करें। स्पष्ट बात किसी को कुछ क्षण के लिए बुरी लग सकती है। लेकिन सुनने वाला भी यह जानता है कि मन में कुढ़ने की जगह स्पष्ट रूप से बात कह कर समस्या का समाधान कर लेना अधिक अच्छा होता है।


स्वावलंबी
स्वावलंबी व्यक्ति को दूसरे के सहारे की आवश्यकता नहीं रहती। वह अपने प्रयास से सफलता पा लेता है। उसे अपने ऊपर विश्वास रहता है। वह भाग्य के सहारे नहीं रहता है। वह किसी भी कार्य को असंभव नहीं समझता। वरन आगे बढ़ कर हर मुश्किल हरा अपनी मंजिल को पाता है। वह प्रयत्न करना कभी नहीं छोड़ता।

साहसी
साहस की जिंदगी सबसे बड़ी जिंदगी होती है। यह निडर और बेखौफ होती है। बेखौफ इंसान इस बात की फिक्र नहीं करता कि दूसरा उसके बारे में क्या सोचता है। वह अड़ोस-पड़ोस को देख कर नहीं चलता। वह यह नहीं सोचता कि उसके इस कदम का परिणाम क्या होगा। डर कर जीना उसके लिए सबसे बड़ी हार है। और मैं इस हार को कभी जीतते नहीं देखना चाहती। संकटों का सामना करके ही मंजिल मिलती है।
आशावादी
जीवन में हार कर बैठना कायर लोगों की निशानी है। आशाएँ शुभ निशानी हैं। किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प और आशावादी होने की आवश्यकता है। आशावादी व्यक्ति अपने भाग्य का निर्माण स्वयं करता है। आज जो परिस्थिति है उससे हार न मान कर अच्छे परिणामों के लिए परिश्रम करने से ही सफलता मिलती है।
पारिवारिक रिश्ते
किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए यह आवश्यक है कि जैसे हम अपने परिवार के साथ रिश्ते निभाते हैं उसी प्रकार अपने साथी के परिवार के साथ भी रिश्ते निभाएँ। मैं एक संयुक्त परिवार के साथ रहती हूँ और सभी रिश्ते निभाती हूँ। इसलिए मेरे लिए अपने साथी के परिवार के साथ सामंजस्य बैठाने में भी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। मेरे लिए रिश्ते सर्वोपरि हैं।