वाशिंगटन, वैज्ञानिकों ने एचआईवी संक्रमण का पता लगाने के लिए एक नायाब तरीका विकसित किया है, जिससे इस बीमारी के इलाज और बचाव के लिए उपचार के नए तरीके विकसित करने में मदद मिलेगी। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस तरीके के जरिए प्रत्येक विरियोन्स (संक्रमण कण) का संक्रमण से संबंध समझने के लिए उसके व्यवहार को देखा जाता है। अमेरिका के नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता थामस होप ने कहा यह तरीका और यह कह सकना कि विरियोन ने उस कोशिका को संक्रमित किया है। इस दिशा में सपष्टता लाने में मदद करेगा।

होप ने कहा कि इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी कोशिका को संक्रमित करने के लिए विषाणु को वास्तव में क्या करने की जरूरत होती है। इससे हमें कई नए विवरण मिलते हैं जैसे कि सेल में किस जगह यह हुआ है और प्रत्येक घटना का समय। विषाणु के बारे में हम जितना ज्यादा जानेंगे, उतना ही इसे रोकने के लिए हमारे पास बेहतर संभावनाएं होंगी। शोध परिणामों के जरिए एचआईवी घटनाचक्र की प्रक्रिया को गहरे से समझने के साथ ही एचआईवी के बचाव और उपचार के लिए नए तरीकों को विकसित करने में मदद मिलेगी।

संक्रमण के वक्त एचआईवी लक्षित प्रतिरोधी कोशिका से मिल जाता है और अपने कैपसिड (एक शंकु जो विषाणु की अनुवांशिक सामग्री को धारण करके रखता है) को कोशिका के कोशिकाद्रव्य में छोड़ देता है। वहां से कैपसिड अनकोटिंग प्रक्रिया के जरिए अलग हो जाता है। यह प्रक्रिया आरएनए जीनोम से विषाणुजनित डीएनए के संकलन के लिए जरूरी होता है और फिर यह कोशिका की सभी क्रियाओं पर कब्जा कर लेता है। अध्ययन में वैज्ञानिकों द्वारा एक नए तरीके का लाइव-सेल फ्लोरोसेंट ईमेजिंग सिस्टम प्रयोग किया गया, जिससे वह पहली बार संक्रमण से जुड़े प्रत्येक कण की पहचान कर पाए।