राजस्थान के बीकानेर में मनी लॉड्रिंग से जुड़े जमीन खरीद और बेचने के मामले में रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी) ने इस मामले में वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की राजस्थान हाईकोर्ट से इजाजत मांगी है। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई सोमवार को होगी। हाईकोर्ट ने इस मामले में कल होने वाली सुनवाई तक वाड्रा की गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है।

रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट में विभिन्न कारणों से सुनवाई कई बार टल चुकी है। इस मामले पर बहस भी शुरू नहीं हो पाई है। जबकि ईडी की तरफ से कई बार बहस शुरू करने का आग्रह किया जा चुका है। ऐसे में अब ईडी ने वाड्रा व सह आरोपी महेश नागर को हिरासत में लेकर पूछताछ की इजाजत मांगी है। सोमवार को न्यायाधीश पुष्पेन्द्र सिंह भाटी की पीठ में इस मामले की सुनवाई होगी। ईडी की तरफ से एएसजी राजदीपक रस्तोगी व भानू प्रताप बोहरा पक्ष रखेंगे। जबकि वाड्रा का पक्ष सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी रखेंगे।

मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले की ईडी ने जांच शुरू की
मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले की ईडी ने जांच शुरू की थी। ईडी की पूछताछ से बचने के लिए वाड्रा लंबे अरसे से कोशिश करते रहे हैं। कई बार समन जारी करने के बावजूद वे ईडी के सामने पेश नहीं हुए। ईडी की सख्ती पर वाड्रा ने हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्य पीठ में अपील दायर कर पूछताछ पर ही सवालिया निशान लगाया। हाईकोर्ट ने वाड्रा को आदेश दिया कि वे अपनी मां मौरिन के साथ ईडी के समक्ष पेश होकर उनके सवालों का जवाब दें। इसके बाद वाड्रा जयपुर में ईडी के समक्ष पेश हुए थे।

क्या है पूरा मामला
2007 में वाड्रा ने स्काइलाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक कंपनी की शुरुआत की। रॉबर्ट और उनकी मां मौरीन इस कंपनी के डायरेक्टर बनाए गए। बाद में कंपनी का नाम बदलकर स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी लिमिटेड लायबिलिटी कर दिया गया। रजिस्ट्रेशन के वक्त बताया गया था कि ये कंपनी रेस्टोरेंट, बार और कैंटीन चलाने जैसे काम करेगी।

वाड्रा की कंपनी ने 2012 में बीकानेर के कोलायत क्षेत्र में कुछ दलालों के जरिए 270 बीघा जमीन 79 लाख रुपए में खरीदी। बीकानेर में भारतीय सेना की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के लिए जमीन आवंटित की गई थी। यहां से विस्थापित हुए लोगों के लिए दूसरी जगह पर 1400 बीघा जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन कुछ लोगों ने इस जमीन के फर्जी कागजात तैयार करवाकर वाड्रा की कंपनी को बेच दिए थे।

यह जमीन सेना की थी और इसका बेचा नहीं जा सकता था। उन दलालों के माध्यम से ही वाड्रा ने क्षेत्र के कुछ गांवों में और जमीन खरीदने का प्रयास किया, लेकिन मामला आगे बढ़ नहीं पाया। फर्जी तरीके से जमीन खरीदने का मामला उजागर होने से पहले वाड्रा की कंपनी ने इस जमीन को 5 करोड़ रुपए में बेच दिया। ईडी ने इस मामले में कुछ स्थानीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी है। उनकी मिलीभगत से कुछ लोगों ने जमीन के फर्जी कागजात तैयार कराए थे।