6 दिन से जोधपुर के तखतसागर जलाशय को कुछ बेबस निगाहें ताक रही हैं। आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे हैं। रोजाना ये लोग थके व बोझिल कदमों के साथ तखतसागर तक पहुंचते हैं। टकटकी लगाए लगातार तखतसागर को देखते रहते हैं। किसी के मुंह से कोई शब्द नहीं निकलता। अलबत्ता कभी कभार कोई सिसकी इस सन्नाटे को तोड़ देती है। बेहद हल्की सिसकी भी वहां खड़े 200 से अधिक सैनिकों को नश्तर के समान चुभती प्रतीत होती है, लेकिन वे किसी प्रकार का ढांढस बंधाने में स्वयं को असहाय पाते हैं। थोड़ी देर में नाउम्मीदी में झुके कंधों के साथ उनके कदम फिर लौट पड़ते हैं।

अभ्यास के दौरान 6 दिन पहले तखतसागर में डूबे सेना के कमांडो कैप्टन अंकित गुप्ता की नवविवाहित पत्नी, माता-पिता, ससुर सहित अन्य परिजन बहुत बुरे दौर से गुजर रहे हैं। पति, बेटा व दामाद को खोने के बाद टूट चुके ये लोग रोज दिन में एक बार तखतसागर पहुंचते हैं। थोड़ी देर के लिए वहां ठहरते हैं। ये सभी एक तरफ खड़े होकर उनके लाडले को खोजने में जुटे जवानों की गतिविधियों को ताकते रहते हैं। फिर सेना के लोग उन्हें समझा कर वापस ले जाते हैं। 6 दिन से लगातार ऐसा हो रहा है।

तखतसागर की गहराई में कैप्टन अंकित की खोज में जुटे सभी लोग इनसे नजर तक मिलाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। वे कुछ जवानों से वहां चल रहे सर्च ऑपरेशन के बारे में जानकारी लेते हैं। इसके बाद चुपचाप खड़े होकर एकटक पहाड़ों के बीच भरे पानी को निहारते रहते हैं। सभी परिजनों का खाना-पीना छूटा हुआ है। राहत कार्य में जुटे लोगों का कहना है कि परिजनों को देख हमें भी कई बार लगता है कि हम कितने असहाय हैं। इनके लाडले को हम खोज नहीं पा रहे हैं। इन लोगों के वहां खड़े रहने के दौरान पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहता है। किसी के मुंह से आवाज तक नहीं निकलती है।

अंकित के परिजनों को सैन्य क्षेत्र में ही ठहराया हुआ है। कई अधिकारियों की पत्नियां लगातार कैप्टन अंकित के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधा रही हैं। इन लोगों के हलक में निवाला तक नहीं उतर पा रहा है। ऐसे में सेना के अधिकारी व उनके परिजन इनके साथ लगातार बने हुए हैं।

23 नवंबर को कैप्टन अंकित की शादी हुई थी। हादसे की सूचना पर उनकी पत्नी भी जोधपुर पहुंचीं हुई हैं।

23 नवंबर को कैप्टन अंकित की शादी हुई थी। हादसे की सूचना पर उनकी पत्नी भी जोधपुर पहुंचीं हुई हैं।

46 फीट भरा है पानी, मार्कोस कमांडो तक नहीं तलाश पाए अंकित को
61 फीट भराव क्षमता वाले तखतसागर में इस समय 46 फीट पानी भरा हुआ है। इसका तल समतल नहीं होकर पहाड़ी क्षेत्र है। साथ ही इसमें बहुत अधिक झाड़ियां उगी हुई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पानी की गहराई में जाने के दौरान अंकित इनके बीच में कहीं फंस गए होंगे। पिछले 5 दिनों में आर्मी ने जलाशय में अंकित की तलाश के लिए पूरी ताकत लगा दी है। आर्मी ने मुंबई से नेवी के मार्कोंस कमांडो को तलाश अभियान के लिए बुलाया। लेकिन, वह अब तक सफल नहीं हुए। इसके अलावा, सेना ने देशभर से विशेषज गोताखोर बुलाए हैं। लेकिन रिजल्ट सिफर रहा है। सोमवार शाम को सेना ने भारी-भारी कंप्रेशर पंप से जलाशय में हिलोरे पैदा की। इस तकनीक से नीचे का पानी ऊपर आ जाता है। लेकिन इसका भी कोई परिणाम नहीं निकला।

ऐसे हुआ था हादसा पैरा कमांडो स्पेशल फोर्सेज का पूरे साल अभ्यास चलता रहता है। डेजर्ट वारफेयर में महारत रखने वाली 10 पैरा के कमांडो को एक हेलिकॉप्टर से पहले अपनी बोट को पानी में फेंक स्वयं भी कूदना था। इसके बाद उन्हें बोट पर सवार होकर दुश्मन पर हमला बोलना था। इस अभियान के तहत कैप्टन अंकित के नेतृत्व में 4 कमांडो ने तखत सागर जलाशय में गुरुवार को पहले अपनी नाव को फेंका और उसके बाद खुद भी पानी में कूद पड़े। तीन कमांडो तो नाव पर पहुंच गए, लेकिन कैप्टन अंकित नहीं पहुंच पाए। उनके साथ कमांडो ने थोड़ा इंतजार करने के बाद किसी अनहोनी की आशंका से स्वयं पानी में उतर खोज शुरू की। साथ ही अपने अन्य साथियों के माध्यम से जोधपुर स्थित मुख्यालय पर सूचना दी। इसके बाद 10 पैरा के अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और खोज अभियान शुरू किया।