डेस्क: कई बार आपको अपने पितरों के श्राद्ध का दिन पता नहीं होता या हमको याद भी नहीं रहता। तिथियों पर श्राद्ध तो उन्हीं का ही किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि हमको याद हो। ऐसे में श्राद्ध को लेकर यह भ्रांति रहती है कि हम अपने पितरों का श्राद्ध कब करें। इसके लिए आल हम आपको कुछ उपाय बता रहे हैं जो आपकी इस समस्या को हल कर देगा।

ये हैं वे उपाय
पहला उपाय
यदि तिथि याद न हो तो पितृ विसर्जनी अमावस्या जो इस साल 8 अक्टूबर को है इस दिन ज्ञात-अज्ञात पितरों का एक साथ श्राद्ध किया जा सकता है। लेकिन इसमें भोजनांश या मिठाई सोलह अंशों में निकलेगी। इससे समस्त पितरों की तृप्ति होगी। और आपको उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होगा।

दूसरा उपाय
आपको तिथि याद नहीं है तो भी आप प्रतिदिन ( अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए) तर्पण कर सकते हैं। तर्पण के लिए यह आवश्यक नहीं है कि आपको अपने पितरों की तिथि याद हो। आप पितरों के निमित कभी भी तर्पण कर सकते हैं। यह विधि आसान है। एक पात्र में कच्चा दूध, कुश, जल, पुष्प लें। दाएं हाथ के अंगूठे को पृथ्वी की ओर करें और जल से तर्पण करते रहें। ऊं पितृदेवताभ्यो नम:।
तीसरा उपाय
आप प्रतिदिन दूध और मीठा अपने पितरों के नाम पर निकाल दें । इसे कौओं, गाय, कुत्ते या चीटियों को खिला दें।