जयपुर: राजे सरकार को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। खनन महाघूस कांड के बाद राजे सरकार द्वारा निरस्त की गई 634 एलओआई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को स्थाई स्टे कर दिया है और सभी एलओआई धारकों को नोटिस भेजकर जवाब मांगे हैं। खनन महाघूस कांड से पहले खान विभाग के अधिकारियों ने केंद्र की गाइडलाइन के बाद भी अंधाधुंध एलओआई जारी की थी। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले का पूरा मामला 

- 16 सितंबर 2015 को हुआ घूसकांड का खुलासा
- तत्कालीन प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी सहित 6 गिरफ्तार
- केंद्र की गाइडलाइन को धता बताकर किए आवंटन
- 19 हजार से ज्यादा आवेदकों के साथ खिलवाड़
- चहेतों को खनन पट्टे जारी करने के दिए मंशा पत्र
- सरकार ने सौंपी थी लोकायुक्त को जांच
- 14 महीने तक चली लोकायुक्त की जांच
- एक ही दिन आवेदन, उसी दिन आवंटन का मामला 
- निदेशालय के शीर्ष अधिकारी भी रहे भ्रष्टाचार में लिप्त
- लोकायुक्त ने 6 को माना मामले में दोषी

- भ्रष्टाचार की 60 फाइलों पर तत्कालीन निदेशक डीएस मारू के हस्ताक्षर
- आखिर मारू ने एक ही दिन में कैसे कर दिए हस्ताक्षर
- बिना डीमार्केशन, राजस्व रिपोर्ट देखे कर दिए हस्ताक्षर
- जिस दिन आवेदन उसी दिन कर दिया आवंटन
- एसएमई एनएस शक्तावत की भूमिका भी रही संदिग्ध
- सात एलओआई आवेदन के दिन ही आवंटित
- भीलवाड़ा में दो, उदयपुर में दो आवंटन एक ही दिन
- चित्तोड़, राजसमंद, जैसलमेर का एक-एक मामला
- राज्य सरकार ने 17 दिसंबर 2016 को की एलओआई रद्द
- आज सुप्रीम कोर्ट ने भी दी राजे सरकार को राहत
- हाईकोर्ट के आदेशें को पूर्व एकतरफा स्टे किया

प्रदेश में 30 अक्टूबर 2014 से पहले खनन ब्लॉक्स रिक्त नहीं थे। लेकिन केंद्र द्वारा नए एमएमडीआर एक्ट आने की गाइडलाइन जारी करते ही महज दो महीने में खनन क्षेत्र रिक्त हो गए, आवेदन मांग लिए गए और एक ही दिन में आवेदन पर आवंटन भी कर दिए गए। आवेदनों की ना मौका जांच हुई, ना एस्टीमेट बने, डीमार्केशन भी नहीं हुआ और राजस्व रिपोर्ट भी नहीं ली। 

इससे भी अचरज की बात यह है कि जिस जगह का आवंटन हुआ वहां मिनरल कौनसा था और एलओआई किसी और मिनरल की जारी की गई। पूरे मामले में खान विभाग के तत्कालीन निदेशक डीएस मारू बिना जांच किए ही अधिकांश फाइलों पर दस्तखत कर आवंटन कर दिए। मारू के साथ ही मुख्यालय में मेजर मिनरल के एसएमई एनएस शक्तावत ने भी आवेदनों की जांच करने की जहमत नहीं उठाई। मामले की जांच लोकायुक्त ने जांच की जिसमें 19 हजार आवेदकों के ओवदन और इसके बाद की पूरी प्रक्रिया को जांच के दायरे में रखा गया। दरअसल लोकायुक्त ने देखा कि लोगों ने कैसे तैसे धन एकत्र कर आवेदन लगाए और जिनके आवेदनों पर आवंटन हो गया उनका क्या कसूर था। रिश्वतखोरों की जमात न केवल सरकार को करोड़ों का चूना लगाया वरन हजारों लोगों की की गाढ़ी कमाई को एक ही झटके में हड़प लिया। 

खदानों में भ्रष्टाचार की दीमक भले ही वर्षों पहले लग चुकी हो लेकिन खदानों में भ्रष्टाचार का घुन लगा वर्ष 2014 में 30 अक्टूबर के बाद। केद्र ने इसी दिन एक गाइडलाइन जारी कर सभी राज्यों को स्पष्ट किया कि नया एमएमडीआर एक्ट लाया जा रहा है जिसमें 'पहले आओ, पहले पाओ' की व्यवस्था को समाप्त कर 'नीलामी' से खनन आवंटन किया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में कोई भी राज्य नया एमएमडीआर एक्ट आने तक नए आवंटन न करे। लेकिन प्रदेश में खनन रिश्वत कांड के मुख्य आरोपी और इस अवधि में खान विभाग के प्रमुख सचिव रहे अशोक सिंघवी और उनके मातहत अधिकारी एवं दलाल संजय सेठी ने मिलकर 1 नवंबर 2014 से 12 जनवरी 2015 की अवधि में 548 मंशा पत्र और 53 पीएल सहित कुल 601 आवंटन कर दिए। इनमें से सात मंशा पत्र तो आवेदन के दिन ही कर दिए। मामले से एसीबी ने 16 सितंबर को पर्दा उठाया और सिंघवी सहित आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद सरकार ने जांच समिति का गठन भी कर दिया और समिति की रिपोर्ट के बाद 19 अक्टूबर को सभी 601 आवंटन रद्द कर जांच लोकायुक्त को सौंप थी। मामले में 12 जनवरी 2015 से पहले की 634 एलओआई को संदेह से देखा गया। इनमें चार मेजर मिनरल की थी। इन सभी को 11 जनवरी 2017 से पहले बहाल करना था लेकिन खान विभाग ने ऐसा नहीं किया। इसके बाद वंडर सीमेंट मामले को हाईकोर्ट ले गया। 

हाईकोर्ट ने स्पष्ट पूछा कि एलओआई सही थी तो इन्हें समय पर एमएल में तब्दील क्यों नहीं किया गया और गलत जारी की तो दोषी कौन हैं और उन पर क्या कार्रवाई हुई। हाईकोर्ट के आदेश पर कमेटी भी बननी थी। लेकिन राज्य सरकार मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई। आज एएजी शिवमंगल शर्मा ने मामले में पैरवी की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को पूर्व एकतरफा स्टे करते हुए सभी एलओआई धारकों को नोटिस जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब प्रदेश में ये 634 खनन प्लॉट्स एक तरह से रिक्त माने जाएंगे और सरकार इन पर नए नियमों के मुताबिक आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर सकेगी।