नागौर:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना लंबी बीमारियों से पीड़ित रोगियों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत मरीजों को बाजार भाव से काफी कम कीमत पर दवाइयां मुहैया कराई जा रही है। जिससे इलाज के लिए आम जनता की जेब पर अब उतना भार नहीं पड़ रहा जितना पहले पड़ता था। योजना की खास बात ये है कि तहत मधुमेह, पेट की बीमारियों, ह्रदय रोग, गुर्दे की बीमारियों सहित लंबी ,चलने वाली ऐसी तमाम बीमारियों की दवाऐं सरकार बाजार कीमत से कम कीमत पर उपलब्ध करा रही हैं।

योजना से लाभांवित होने वाले लोगों का मनना है कि प्रधानमंत्री जी की इस योजना से उनके बीमारियों से जुड़ी दवाइयों का खर्चा बहुत कम हो गया है। साथ अब दवाइयों की उपलब्धता भी बढ़ गई है। जिन दवाईयों के लिए पहले उन्हें दूर के दवाखानों में जाना पड़ता था अब वह योजना के औषधी केन्द्रों पर ही मिल जाती है। बता दें कि परियोजना को क्रियांवित करने के लिए नागौर जिले के डीडवाना ,लाडनू, जायल सहित देशभर मे अस्पताल परिसरो के आसपास प्रधानमंत्री करीब 3700 जन औषधि केन्द्र खोले गऐ है।

जबकि सिर्फ राजस्थान में इन जन औषधि केन्द्रों की संख्या लगभग 400 है। जो मरीजों को बाजार भाव से करीब 60 से 70 फीसदी कम कीमत पर दवाऐं उपलब्ध करा रहे है। योजना से जुड़े प्रतिनिधि बताते है कि लंबे समय तक दवाऐं लेने वाले लोगों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद पहल करते हुऐ यह योजना बनाई है। जिसके तहत तय बीमारों को कम से कम कीमत पर दवाऐं उपलब्ध कराई जा रही हैं। दवाओ के साथ साथ मधुमेह की जांच करने वाला ग्लूकोमीटर, सहित अन्य संसाधन भी परियोजना में बाजार भाव से कम कीमत पर औषधि केन्द्रों पर उपलब्ध है।

वर्तमान मे प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के तहत संचालित औषधि केन्द्रो के जरिए करीब 700 तरह की दवाऐं रोगियों को उपलब्ध कराई जा रही है। जबकि आने वाले समय मे दवाओं की तादाद बढ़ाने की बात चल रही है। सामाजिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि योजना को आम जनता के लिए फायदेमंद बताने के साथ साथ औषधि केन्द्रों  की संख्या बढाने की मांग भी कर रहे है। प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र परियोजना यकीनन देश के एक ऐसे बड़े तबके को लाभांवित करने वाली योजना है जो गंभीर रोगों से पीड़ित हैं। लेकिन योजना का असली मकसद तभी पूरा होगा जबकि आम जनता को इसकी पूरी जानकारी मिलेगी और देश के ज्यादातर क्षेत्रों मे औषधि केन्द्र खोले जाएंगे।