स्वच्छ भारत आंदोलन की चौथी सालगिरह पर पीएम मोदी ने एक बार फिर स्वच्छता अभियान को नई गति देने की तैयारी पूरी कर ली है। महात्मा गांधी की 150 सालगिरह को मनाने की शुरुआत सितंबर 15 से हो रही है। सितंबर 15 से महात्मा गांधी के जन्मदिन यानी 2 अक्टूबर तक 20 करोड़ लोगों को 'स्वच्छता ही सेवा' जनआंदोलन का भागीदार बनाया जाएगा। शनिवार यानी 15 सितंबर को पीएम मोदी खुद देश के 15 स्थानों से विडियो कांफ्रेंसिग के जरिए इस कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। साथ ही साथ दिल्ली में दो से तीन जगहों पर श्रमदान भी कर सकते हैं। राज्य के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों के भी रोल इस आंदोलन में तय किए गए हैं। सभी अपनी अपनी राजधानियों में जनता को संबोधित कर कार्यक्रम की शुरुआत भी करेंगे। साथ ही राज्यों में स्वच्छता पुरस्कारों की शुरुआत भी की जाएगी। संदेश होगा- स्वच्छ भारत बनाना देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

इस देशव्यापी अभियान की रुपरेखा 4 सितंबर को मंत्रिपरिषद की बैठक में ही साफ कर दी गई थी। मोदी मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों की मौजूदगी में स्वच्छता ही सेवा के नाम से एक प्रेजेंटेशन हुआ जिसमें कई मंत्रालयों के रोल निर्धारित किए गए। इसमें तय हुआ कि-

  • 15 सितंबर को पीएम मोदी इस अभियान की शुरुआत करेंगे। स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। क्लास 3 से 5 के बच्चों को हाथ धोने के कैंप में, तो क्लास 6 से 12 के बच्चों को स्कूल से बाहर स्वच्छता अभियान में हिस्सा बनाया जाएगा।
  • 16 सितंबर को ग्राम पंचायतों में स्वच्छता सभाएं आयोजित की जाएंगी। ऐजेंडा होगा अपने पंचायतों की सफाई की समीक्षा और भविष्य का एक्शन प्लान बनाना।
  • 17 सितंबर सेवा दिवस के रुप में मनाया जाएगा। देश भर में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा जिसमें मंत्रियों के साथ-साथ केन्द्र और राज्य सरकार के कर्मचारी भी हिस्सा लेंगे।
  • 22 सितंबर को रेलवे स्वच्छता दिवस होगा—सभी यात्रियों, रेल कर्मचारियों और उनके परिवारों से ट्रेनों, स्टेशनों और अपने आस-पास के इलाकों को साफ रखने का अभियान का हिस्सा बनना होगा।
  • 25 सितंबर पर अन्त्योदय दिवस को हर स्वेच्छाग्राही को अपनी एक टीम बनाने को कहा जाएगा। हर टीम अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त बनाने का अभियान चलाएगी।
  • 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय सैनिटेशन कन्वेंशन का आयोजन किया जाएगा।


स्वच्छता आंदोलन अपने आखिरी दौर में पहुंच रहा है। इसलिए समाज के हर वर्ग तक पहुंचने की पूरी तैयारी की गयी है। महिला सरपंचों, छात्रों, नागरिक समितियां, युवा संगठनों और कॉरपोरेट जगत के साथ साथ फिल्म और खेल से जुड़ी जानी-मानी हस्तियों  को इस अभियान का हिस्सा बनाया गया है। केन्द्र सरकार के तमाम मंत्रियों को कहा गया है कि इस पखवाड़े में अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर श्रमदान करें और साथ ही प्रेस कांफ्रेंस कर के लोगों तक संदेश भी पहुंचाएं।

हर मंत्रालय को अपना स्वच्छता ही सेवा एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया है। श्रमदान की गतिविधियों में घर-घर जाकर जागरुकता अभियान, कूड़ा जमा करना, लोगों को एकजुट कर किसी स्थान की सफाई करना, गांवों और स्कूलों में रैलियां निकालना, नुक्कड़ नाटक, लोक गीत और नृत्य के सहारे जन जागरण अभियान चलाना और टॉयलेट निर्माण शामिल हैं।

इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि एक दर्जन मंत्रालय इस अभियान को चलाने के लिए चुने गए हैं जिनके लिए लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं। स्वच्छ भारत पर हुए प्रेजेंटेंशन (जिसकी कॉपी न्यूज 18 के पास है) के मुताबिक इन सभी मंत्रालयों के लिए लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं।
रेल मंत्रालय का लक्ष्य है 2 अक्टूबर तक सभी ट्रेनों में स्वच्छ भारत का लोगो और हर रेल कोच पर राष्ट्रीय झंडा नजर आना चाहिए। हर रेल ट्रैक पर सेल्फ हेल्प ग्रुपों द्वारा पौधे लगाने होंगे। दिल्ली, आगरा, जयपुर जैसे ऐतिहासिक स्थानों तक पहुंचने वाली सारी पटरियों की सफाई करने का लक्ष्य है। साथ ही सभी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों को रेलवे स्टेशनों और अपनी कॉलनी की सफाई का हिस्सा बनना होगा।

शहरी विकास मंत्रालय का लक्ष्य सीवरों की सफाई का एक्शन प्लान तैयार करना और सभी औद्धयोगिक क्षेत्रों में सैनिटेशन ड्राइव शुरु करना होगा।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना कि स्कूल अपने छात्रों की रैलियां निकलवाएं और साथ ही वे पीएम मोदी को खत लिख कर स्वच्छ भारत के लिए अपनी कटिबद्धता बताएंगे।

ग्रामीण विकास मंत्रालय सभी 2।5 लाख ग्राम पंचायतों में स्वच्छता ग्राम सभा और श्रमदान कार्यक्रम करेगा। हर ग्राम पंचायत में खुले में शौच मुक्त का बोर्ड लगाने के लिए साथ-साथ कम से कम एक नुक्कड़ नाटक का आयोजन करना होगा।

इनके साथ कौशल विकास मंत्रालय, युवा और खेल, पर्यटन, संस्कृति, विदेश, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, डीओपीटी मंत्रालयों को भी लक्ष्य दिए गए हैं।

जनता के चुने गए प्रतिनिधि यानि विधायकों और सांसदों को भी इसका हिस्सा बनाया गया है। इन्हें कहा गया है कि स्थानीय स्वच्छताग्रहियों को कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित करें। अपने क्षेत्रों में श्रमदान कार्यक्रमों का नेतृतव करें। स्थानीय गणमान्य लोगों को भी सफाई अभियान का हिस्सा बनाएं। स्वच्छता ही सेवा का लक्ष्य देकर ही पीएम मोदी नहीं थमे हैं। हर मंत्रालय को 30 सितंबर तक अपने कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें, कार्यक्रम की पहुंच और सफलता से जुडी रिपोर्ट सरकारी वेबसाईट sbm।gov।in/shs2018 पर देनी होंगी।