जयपुर:विधानसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस ने भाजपा सरकार के अंतिम 6 माह के फैसलों को चुनावी मुद्दा बनाया। कांग्रेस सरकार ने यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में कमेटी बनाई, जिसमें ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला और खाद्य मंत्री रमेश मीणा भी थे। एक साल की जांच के बाद कमेटी भंग कर दी गई। इस दौरान जांच के बाद कमेटी ने कोई गड़बड़ी या घोटाले को उजाकर नहीं किया। इन्हीं मुद्दों को लेकर दैनिक भास्कर ने कमेटी के अध्यक्ष और यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल से बातचीत की। पेश है प्रमुख अंश :

सवाल- वसुंधरा सरकार के अंतिम 6 महीने के फैसलों को चुनावी मुद्दा बनाया। अब एक साल बाद जांच कर रही कैबिनेट सब कमेटी ही भंग कर दी गई। ऐसा क्यों हुआ?

जवाब: अंतिम छह महीने के फैसलों की जांच करने की एक परिपाटी बन गई है। पहली बार 1998-2003 के दौरान कांग्रेस सरकार के फैसले का रिव्यू वसुंधरा राजे सरकार ने किया। उसके बाद से सिलसिला चला आ रहा है। इस एक साल में कमेटी के पास 1067 मामले आए। इसमें कमेटी ने भाजपा सरकार के 801 मामलों को सही पाया। 220 मामलों में आईएएस अफसरों ने ब्रीफ नोट नहीं भेजा। 46 मामलों में एक्शन लिया गया है। 14 विभागों ने तो सूचना ही नहीं दी। ऐसे में मैंने सीएम से अनुरोध किया कि हर मंत्री अपने स्तर पर ही रिव्यू करें।
 

सवाल- चर्चा है कि कैबिनेट सब कमेटी के सदस्य और खाद्य मंत्री रमेश मीणा के विरोध के चलते आपने कमेटी भंग करने की सिफारिश की है?

जवाब : रमेश मीणा की कुछ मामलों पर आपत्ति जरूर थी, लेकिन उन्होंने कभी भी कोई लिखित में आपत्ति दर्ज नहीं कराई। इसका कोई रिकार्ड भी नहीं है। ऐसे में कमेटी ने बहुमत के आधार पर फैसले लिए। बिजली और किरोड़ी मीणा से संबंधित मामलों में खाद्य मंत्री रमेश मीणा का विरोध था, लेकिन हमें फैक्ट देखने पड़ेंगे।
 

संसदीय मंत्री के नाते सदन में आपका काम फ्लोर मैनेजमेंट का है, लेकिन आपके विपक्ष अक्सर हमलावर हो जाता है?
जवाब : विपक्ष से मेरे रिश्ते बहुत अच्छे है। कई ऐसे अवसर आते हैं, जब विपक्ष को उसी की भाषा में जवाब देना पड़ता है। यह प्रदेश केवल कांग्रेस का नहीं है। यह प्रदेश भाजपा का भी है। ऐसे में भाजपा को सदन में अच्छे सुझावों के साथ आना चाहिए। सरकार से यदि कोई गलती हो तो उसे बताना चाहिए। सरकार ठीक करने के लिए तैयार है।
 

सीएए को सरकार राजस्थान में कब लागू करने जा रही है? कपिल सिब्बल और सीपी जोशी बाेल चुके हैं कि राज्यों को यह कानून लागू करना पड़ेगा?
जवाब : केंद्र के किसी भी कानून को लागू करने से मना नहीं किया जा सकता, लेकिन राज्य सरकार ने धार्मिक आधार पर इस कानून को लागू करने का विरोध किया है। केंद्र से अनुराेध किया है कि इसमे संशोधन कीजिए। यदि केंद्र नहीं माना तो फिर कैबिनेट में चर्चा के बाद तय किया जाएगा कि आगे कैसे लागू करना है?