पाकिस्तान, पाकिस्तान में कुष्ठ रोग को खत्म करने के लिए अपने जीवन को समर्पित करने वाली डॉ. रुथ फाउ और पाकिस्तान में 'मदर टेरेसा' के नाम से लोकप्रिय 87 बर्षीय डॉ. रुथ फाउ का लंबी बीमारी के चलते करांची के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। डॉ. रुथ फाउ ने पहली बार 1960 में पाकिस्तान का दौरा किया था और कुष्ठ रोगियों का दर्द उनके दिल को इस कदर छू गया कि उन्होंने कुष्ठ रोगियों के इलाज के लिए पाकिस्ताम ने रहने का फैसला कर लिया।

नन ने कराची में 1962 में मेरी एडिलेड लेप्रोसी सेंटर की शुरुआत की और बाद में गिलगिट-बालटिस्तान सहित पाकिस्तान के सभी प्रांतों में इसकी शाखाएं खोली जिसके बाद उन्होंने 50,000 से अधिक परिवारों का इलाज किया। डॉ. रुथ फाउ के अथक प्रयासों के कारण, 1996 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पाकिस्तान का नाम एशिया में सबसे पहले कुष्ठ रोग से मुक्त होने देशों में से घोषित कर दी। डॉ. रुथ फाउ का जन्म 1929 में जर्मनी में हुआ था। और द्वितीय विश्व युद्ध के साए में उनकी जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ी।

कुछ समय बाद फाउ सोसाइटी 'ऑफ डॉटर्स ऑफ द हर्ट ऑफ मेरी' से जुड गईं और उन्हें भारत की जिम्मेदारी दी गई लेकिन कुछ वीजा दिक्कतों के कारण थोड़े समय के लिए कराची उतरना पड़ा। बंदरगाह वाले इस शहर में कुष्ठ मरीजों से बातचीत ने उन्हें अपनी योजना बदलने और मरीजों की मदद के लिए बाकी जीवन पाकिस्तान में बिताने को प्रेरित किया। पाकिस्तान में लोगों का सेवा करने वाली डॉ रुथ फाउ को 1979 में पाकिस्तान का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान हिलाल-ए-इम्तियाज और 1989 में हिलाल-ए-पाकिस्तान से नवाजा गया। साल 2015 में उन्हें कराची स्थित जर्मन वाणिज्य दूतावास में स्टौफर मेडल से सम्मानित किया गया। डॉ. रुथ फाउ को साल 1988 में पाकिस्तान की नागरिकता दी गई थी। प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने डॉ. फाउ का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किए जाने का ऐलान किया और कहा, 'वह जर्मनी में जन्मी जरूर थीं लेकिन उनका दिल हमेशा पाकिस्तान में रहा'।