26/11 मुंबई आतंकी हमले के मास्टर माइंट हाफिज़ सईद खुद चुनाव नहीं लड़ेगा. हालांकि पाकिस्तान में 25 जुलाई को होने वाले चुनाव में अपनी पार्टी के 200 उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगा.

लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़े संगठन जमात-उद-दावा की राजनीतिक पार्टी का नाम मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) है. हालांकि अभी तक ये पार्टी पाकिस्तान चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड नहीं है. इसलिए आम चुनाव में जमाद-उद-दावा ने निष्क्रिय राजनीतिक पार्टी अल्लाह-हू-अकबर तहरीक (एएटी) से लड़ने का फैसला किया है.

जमात-उद-दावा ने नॉमिनेशन पेपर चुनाव आयोग से ले लिया है और उम्मीदवारों को मैदान में उतार रहा हैं. दरअसल, इस समूह की मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) का राजनीतिक पार्टी के रूप में रजिस्ट्रेशन होना अभी बाकी है. संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य ने इसकी जानकारी दी. जमाद-उद- दावा ने वर्ष 2008 में मुंबई हमले को अंजाम दिया था. इस संगठन ने मिल्ली मुस्लिम लीग के नाम से अपनी राजनीतिक पार्टी शुरू की थी, लेकिन पाकिस्तान चुनाव आयोग के पास यह अब तक रजिस्टर्ड नहीं हो पाया है.

आम चुनाव नजदीक आने के साथ ही संगठन ने निष्क्रिय पड़ी पार्टी 'अल्लाह-हू-अकबर तहरीक' के जरिए चुनाव लड़ने का फैसला किया है. यह पार्टी पाकिस्तान चुनाव आयोग में पहले से दर्ज है. जमात-उद- दावा के एक सदस्य ने बताया, 'यह एक निष्क्रिय पार्टी है, जिसे एहसान नाम के नागरिक ने पंजीकृत कराया था. इस तरह की कई पार्टियां पाकिस्तान चुनाव आयोग में दर्ज है, ताकि मुख्यधारा की किसी पार्टी को अगर परेशानियों का सामना करना पड़े तो वो इनका सहारा ले सकें.' उन्होंने कहा कि एमएमएल के अध्यक्ष सैफुल्ला खालिद इस संबंध में जल्द ही औपचारिक घोषणा करेंगे.
बता दें पाकिस्तान में मौजूदा सरकार का कार्यकाल 31 मई को पूरा हो चुका है और फिलहाल पूर्व मुख्य न्यायाधीश नसीरुल मुल्क को कार्यवाहक प्रधानमंत्री चुना गया है. कार्यवाहक सरकार ही पाकिस्तान में चुनाव कराएगी. पाकिस्तान के संविधान में सरकार का कार्यकाल खत्म होने के 60 दिन में चुनाव कराने होते हैं. खास बात ये है कि पाकिस्तान के इतिहास में ऐसा लगातार दूसरी हो रहा है जब किसी चुनी हुई सरकार ने अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा किया है.