जयपुर:प्रदेश में एक बार फिर अवैध खनन का मामला गरमा गया है। कल सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रदेश सरकार को अवैध खनन रोकने में नाकामी और अरावली दिल्ली-अलवर रीजन के 28 पहाड़ों के गायब होने के मामले में राज्य सरकार को फटकार लगाई। साथ ही 8 फरवरी को मुख्य सचिव को को पेश होने को कहा है। 

दरअसल, प्रदेश के अरावली क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने पिछले वर्ष जून में रिपोर्ट सौंपी थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एम्पावर्ड कमेटी को सौंपी इस रिपोर्ट में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने राजस्थान के अंदर अवैध खनन को लेकर सेटेलाइट सर्वे करवाया था। इस सर्वे में 15 जिलों से गुजर रही अरावली हिल्स में 3233 स्थानों पर अवैध खनन पाया गया जो कि 10364 हेक्टेयर से भी ज्यादा भूमि पर हो रहा है। इस सर्वे रिपोर्ट को सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी को सौंपा गया और कमेटी ने पूरे मामले में राज्य सरकार को आदेश जारी कर अवैध खनन का मौका सत्यापन करने साथ ही साथ अवैध खनन सामग्री का आकलन कर रिपोर्ट देने को कहा था। 

सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी के आदेश के बाद राज्य के मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वह अपने अपने जिले में राजस्व खान व वन विभाग की संयुक्त टीमों का गठन कर अवैध खनन का मौका सत्यापन कराएं। इसके बाद जिला कलेक्टर ने अपने अपने जिले में कमेटियों का गठन किया । जिसमें खान विभाग के फोरमैन, क्षेत्रीय वन अधिकारी वह नायब तहसीलदार का तीन सदस्यीय संयुक्त जांच दल बनाया गया था। इस दल ने अवैध खनन के चिन्हित स्थानों पर जाकर अवैध खनन का मौका सत्यापन किया साथ ही ऐसे स्थान पर अवैध खनन कर निकाले गए खनिज का आकलन कर प्रदेश में 115 हेक्टेयर में अवैध खनन होने और उसे बन्द कराने जी रिपोर्ट दी। लेकिन पिछले वर्ष 23 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया ने 115 हेक्टेयर में अवैध खनन बंद कराने की खान विभाग की दलील को सही नहीं माना। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 48 घंटे में 115 हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध खनन रोकने के आदेश दिए थे साथ ही अलवर दिल्ली रीजन के अरावली क्षेत्र में 138 में से 28 पहाड़ गायब होने के मामले पर भी सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई थी। 

इसके बाद खान विभाग द्वारा दिए गए हलफनामे में बताया गया था कि अवैध खनन पूरी तरह बंद करा दिया गया है। पहाड़ गायब होने के मामले में कहा गया कि वर्ष 1960 में सर्वे ऑफ इंडिया ने इस क्षेत्र में 138 पहाड़ बताए थे जिनमें से 110 आज भी मौजूद है। 58 वर्षों में 28 छोटे पहाड़ों को खनन के द्वारा खत्म होना बताया गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट खान विभाग के तर्क से सहमत नहीं है। कल हुई सुनवाई में राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई गई है। आज मुख्य सचिव ने इस मामले में एसीएस सुदर्शन सेठी और खान विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट कल दोपहर तक तलब की है। अब देखना होगा कि कैसे राज्य सरकार 48 घंटे में सुप्रीम कोर्ट को संतुष्ट कर सके ऐसा जवाब तैयार कर पाएगी।