नई दिल्ली, कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों एवं सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के एक घटक दल के अलग-अलग मुद्दों पर भारी हंगामे की वजह से लोकसभा में सोमवार को लगातार छठे दिन भी कोई कामकाज नहीं हो सका और कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी। एक बार के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही 12 बजे दोबारा जैसे ही शुरू हुई, कई दलों के सदस्य हाथों में बैनर और तख्तियां लिए नारेबाजी करते हुए आसन के समीप पहुंच गए।

महाजन ने जोरदार हंगामे और नारेबाजी के बीच जरूरी दस्तावेज सदन पटल पर रखवाए। शोरशराबे के बीच ही वित्त राज्य मंत्री प्रताप शुक्ला ने चिटफंड संशोधन विधेयक 2018 और भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018 पेश किया। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को चूना लगाने वाले भगोड़े अपराधियों की सम्पत्ति तत्काल जब्त करने संबंधी भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक का बीजू जनत दल (बीजद) के भर्तृहरि महताब ने विरोध किया।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक के प्रावधानों के तहत आम आदमी के मौलिक अधिकारों का हनन होगा। इस बीच भारी हंगामा जारी रहा और सदस्य हाथों में तख्तियां और पोस्टर लिए नारेबारी करते रहे। बाद में सदस्यों का सदन न चलने देने का रुख भांपकर अध्यक्ष ने कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी। मुख्य विपक्षी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य जहां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में हजारों करोड़ रुपए के घोटाले को लेकर नारेबाजी कर रहे थे, वहीं वाईएसआर कांग्रेस और सत्तारूढ जनतांत्रिक गठबंधन की घटक तेलुगूदेशम पार्टी के सदस्य आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर हंगामा कर रहे थे।

अन्नाद्रमुक सदस्य कावेरी प्रबंधन बोर्ड गठित करने और तेलंगाना राष्ट्र समिति के सदस्य तेलंगाना में आरक्षण का कोटा बढ़ाए जाने की मांग को लेकर हंगामा कर रहे थे। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य भी अपनी सीटों पर खड़े होकर नारेबाजी करते देखे गए। गत सप्ताह हंगामे में शामिल राजग की सहयोगी पार्टी शिवसेना के सदस्य आज सदन में नहीं दिखे। पूरा सदन सदस्यों के रंग-बिरंगे पटके से रंगीन था। तेदेपा के सदस्यों ने पीले रंग और अन्नाद्रमुक के सदस्यों ने सफेद, लाल और काले रंग का तिरंगा पटका पहन रखा था। तेलंगाना राष्ट्र समिति के सदस्यों ने गुलाबी रंग के अंगवस्त्र पहने हुए थे। इससे पहले सुबह 11 बजे हंगामे की वजह से  प्रश्नकाल नहीं हो सका था।

सदन की कार्यवाही सुबह जैसे ही शुरू हुई हंगामा शुरू हो गया। इसके बावजूद अध्यक्ष ने शोर शराबा कर रहे सदस्यों से कुछ कहने का प्रयास किया, लेकिन उनकी आवाज सुनाई नहीं दी। शोरगुल के बीच अध्यक्ष ने करीब 3 मिनट तक प्रश्नकाल जारी रखा, लेकिन हंगामें की वजह से कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था, इसलिए महाजन ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी। बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने के दिन (पांच मार्च) से ही सदस्यों का भारी हंगामा जारी है, जिससे सदन में कोई कामकाज नहीं हो पा रहा है।