नई दिल्ली. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रम (MSME) के विकास के लिए प्रतिबद्धता जताते हुए गुरुवार को सरकार ने कहा कि जल्द ही इस क्षेत्र की नयी परिभाषा लायी जाएगी और सहकारी क्षेत्र एवं गैर-सरकारी बैंकिंग कंपनियों से इस क्षेत्र की इकाइयों को लोन सुविधा प्रदान करने के लिए कहा गया है. एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में अपने मंत्रालय के कामकाज पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2024 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 हजार अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है तथा इस लक्ष्य को हासिल करने में एमएसएमई का महत्वपूर्ण योगदान होगा.

22 हजार लोगों को बैंकों से लोन मिला
उन्होंने कहा कि बैंकों को एमएसएमई क्षेत्र को लोन देने के मामले में न्यूनतम कर्ज का लक्ष्य तय करने को कहा गया है. उन्होंने कहा कि सरकार के ताजा प्रयासों के बाद अभी तक 22 हजार लोगों को बैंकों से लोन दिया गया है. गडकरी ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र को अधिक ऋण मिल सके, इसके लिए अब सहकारी क्षेत्र के बैंकों एवं नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) को भी इस क्षेत्र को लोन देने की मंजूरी दे दी गयी है. उन्होंने स्वीकार किया कि वैश्विक कारणों, पूंजी की कमी, जीएसटी (GST) एवं नोटबंदी (Demonetisation) के चलते इस क्षेत्र के लिए कुछ समय परेशानियां खड़ी हो गयी थीं जैसा कोई भी नयी व्यवस्था के आने के बाद स्वाभाविक रूप से होता है.
एमएसएमई क्षेत्र के बजट में कटौती नहीं
विपक्ष द्वारा एमएसएमई क्षेत्र के बजट में कटौती के आरोपों को सिरे से नकारते हुए गडकरी ने कहा कि 2015-16 में बजट 2,620 करोड़ रुपये था जो 2018-19 में बढ़कर 6,552 करोड़ रुपये और 2019-20 में अब तक 7,011 करोड़ रुपये हो गया. उन्होंने कहा कि इस अवधि में वितरित की गयी सब्सिडी क्रमश: 1,020 करोड़ रुपये, 2070 करोड़ रुपये और वर्तमान वर्ष में अभी तक 1,661 करोड़ रुपये है. उन्होंने कहा कि इसी प्रकार उक्त अवधि में इस क्षेत्र में स्थापित की गयी इकाइयां क्रमश: 44,367, 73,427 और 55,737 हैं. इस क्षेत्र में इस अवधि में प्रदान किये गये रोजगार क्रमश: 303362, 587467 और 445896 हैं. इस क्षेत्र को इस अवधि में क्रमश: 20 हजार करोड़ रुपये, 3,168 करोड़ रुये और 3456 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी उपलब्ध करायी गयी.

खादी उद्योग क्षेत्र में ‘कार्पोरेट कल्चर’ लाया जाए
उन्होंने खादी क्षेत्र में हो रही प्रगति की सदस्यों को जानकारी देते हुए बताया कि खादी उद्योग क्षेत्र में सरकार ब्रांडिंग पर जोर दे रही है. उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि इस क्षेत्र में मार्केटिंग के लिए निजी एजेंसियों की मदद ली जाए और इसमें ‘कार्पोरेट कल्चर’ लाया जाए.

गडकरी ने कहा कि पिछले साल इस क्षेत्र में 3,215 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जो इस साल साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये से ऊपर जाएगा. ग्रामोद्योग क्षेत्र में हुए कारोबार की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 2015-16 में यह 40,384 करोड़ रुपये था जो वर्तमान वर्ष में बढ़कर 60,343 करोड़ रुपये हो गया.

उन्होंने कहा कि खादी ग्रामोद्योग की परिभाषा को लेकर काफी विवाद था. इसे लेकर विभिन्न उद्योग संगठनों से बातचीत की गयी और उनके सुझाव लिये गये. उन्होंने कहा कि इस बारे में कानून मंत्रालय से भी विचार-विमर्श कर लिया गया है. अभी प्रधानमंत्री से इस बारे में बातचीत नहीं हुई है.

उन्होंने कहा, मैं आपको आश्वासन देता हूं कि अधिवेशन (संसद का वर्तमान सत्र) समाप्त होने से पहले एमएसएमई क्षेत्र की नयी परिभाषा आ जाएगी. केवीआईसी के आधुनिकीकरण और पेशेवर बनाने के बारे में उन्होंने कहा कि लगभग तीन महीनों में इस संस्था को नया रूप देने का प्रयास किया जा रहा है और इस क्षेत्र को निर्यातोन्मुख बनाने पर जोर दिया जा रहा है.