नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप केस में 2 दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने के खिलाफ लगाई गई पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2017 में दिल्ली हाईकोर्ट के फांसी के फैसले पर सुनवाई की थी। जिसमें कोर्ट ने निचली अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट के फांसी की सजा के फैसले को बरकरार रखा था। विनय शर्मा (23) और पवन गुप्ता (22) की ओर से सजा पर पुनर्विचार करने की अपील की गई थी। शुक्रवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में आरोपियों की दलील सुनी।

अदालत ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लुथरा और दोनों दोषियों के वकील एपी सिंह से इस मामले में अगले मंगलवार तक अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने के लिए कहा है।

- इससे पहले मुकेश की पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। मुकेश ने 9 नवंबर, 2017 को पुनर्विचार याचिका दायर की थी। अक्षय की ओर से पुनर्विचार याचिका अभी दाखिल नहीं की गई है।

मुकेश के वकील ने क्या दलील दी थी?

- मुकेश के वकील एमएल शर्मा से सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, "डीएनए जांच, पीड़िता के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर मुकेश अन्य तीन दोषी ठहराए गए थे। पीड़िता के शरीर पर मुकेश के दांतों के निशान अनदेखी नहीं कर सकते। मुकेश का बयान अहम साक्ष्य है। इस पड़ाव पर नए तथ्य स्वीकार्य नहीं हैं। बताएं कि फैसला कहां गलत है? कोई विश्लेषण या जांच गलत थी तो साबित करो।"

- मुकेश के वकील ने निर्भया के मृत्यु पूर्व बयान को भरोसे लायक नहीं बताया था। वकील ने कहा था- मुकेश काे बस चलानी नहीं आती। लाइसेंस भी सिर्फ दोपहिया का है। टाॅर्चर के बारे में ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था। विचार नहीं हुआ। पुलिस ने भी सही जांच नहीं की।

- दिल्ली पुलिस की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर सिद्धार्थ लूथरा ने मुकेश के वकील की दलीलों पर कहा कि मुकेश ने टार्चर संबंधी कोई भी शिकायत तिहाड़ जेल प्रशासन या ट्रायल कोर्ट में नहीं की। यह मामला पुनर्विचार का नहीं है। याचिका खारिज की जानी चाहिए।

16 दिसंबर को मेडिकल छात्रा से किया था गैंगरेप

- दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में 16 दिसंबर 2012 की रात 23 वर्षीय मेडिकल छात्रा से सामूहिक बलात्कार किया गया था। गैंगरेप के बाद युवती के कपड़े फाड़कर उसे चलती बस से बाहर फेंकने की घटना सामने आई थी। युवती का बाद में 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया था। एक अन्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी।