नई दिल्ली, सरकार ने आज पहलाज निहलानी के स्थान पर गीतकार एवं कवि प्रसून जोशी को सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यहां जारी एक विज्ञप्ति में बताया कि जोशी को तत्काल प्रभाव से तीन साल या अगले आदेश तक के लिए बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जोशी 45 को कला, साहित्य और विज्ञापन के क्षेत्र में उनके योगदान को लेकर 2015 में पद्म प्रदान किया गया था। उन्होंने स्वच्छ भारत के लिए भी गान लिखा। उन्हें दो बार सर्वश्रेष्ठ गीत के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार समेत कई पुरस्कार मिल चुके हैं। अपनी नियुक्ति के बाद पीटीआई भाषा से बातचीत में जोशी ने कहा, नेक इरादा ही अच्छी शुरुआत है।

जिम्मेदारी उठाना और यथाश्रेष्ठ करना ही हमारा प्रयास रहा है। मेरा मानना रहा है कि सही और जिम्मेदारियां रचनात्मक योगदान से बेहतर ढंग से पूरी की जा सकती हैं। उन्होंने कहा, कोई भी व्यक्ति सम्मानित मेधाओं के मार्गदर्शन एवं सहयोग से सकारात्मक बदालव लाने की आस कर सकता है। सरकार ने सेंसर बोर्ड का पुनर्गठन भी किया है। नए सदस्य गौतमी तडीमल्ला, नरेंद्र कोहली, नरेश चंद्र लाल, नील हर्बर्ट नोंगकर्निह, विवेक अग्निहोत्री, वामन केंद्रे, विद्या बालान, टी एस नागभराना, रमेश पतंगे, वानी त्रिपाठी टिक्कू, जीविथा राजशेखर और मिहिर भूटा हैं।

निहलानी का तीन साल का कार्यकाल अगले साल जनवरी में खत्म होने वाला था। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड सीबीएफसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, सीबीएफसी के नए प्रमुख के रप में प्रसून जोशी की नियुक्ति से संबंधित आदेश में यह भी कहा गया है कि उनका कार्यकाल तीन साल या अगले आदेश तक के लिए होगा। लेकिन यह आदेश निहलानी के तीन साल के कार्यकाल से पहले आया है।सीबीएफसी के प्रमुख के रप में जनवरी 2015 में हुई अपनी नियुक्ति के समय से ही निहलानी विभिन्न विवादास्पद कदमों एवं बयानों को लेकर सुर्खियां में रहे हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है, ..... केंद्र सरकार को प्रसून जोशी को 11 अगस्त, 2017 से तीन साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, के लिए मानद क्षमता में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का प्रमुख नियुक्त करते हुए हर्ष हो रहा है।

बोर्ड के सदस्य नियुक्त किए गए निर्देशक अग्निहोत्री ने अमेरिका से पीटीआई भाषा से कहा, प्रसून जोशी और विद्या बालान जैसे लोगों के साथ हम सभी प्रगतिशील हैं। हम बाहरी नहीं हैं और हम फिल्मों को नए कोण से देखेंगे। हाल ही में निहलानी मधुर भंडारकर की इंदू सरकार में कई कांटछांट तथा लिप्स्टिक अंडर माई बुर्का को प्रमाणित करने से इनकार करने को लेकर खबरों में थे। एक अन्य विवाद तब पैदा हो गया था जब सीबीएफसी ने शाहरुख खान की फिल्म व्हेन हैरी मेट सेजल में इंटरकोर्स शब्द पर आपत्ति की।