यरुशलम, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि वह यरुशलम के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा इस्राइल के खिलाफ वोट देने से निराश नहीं हैं और उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत की यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। भारत ने दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया था जिसमें यरुशलम को इस्राइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के अमेरिका के फैसले की आलोचना की गई थी।

नेतन्याहू 14 जनवरी को भारत की यात्रा के लिए रवाना होंगे। उन्होंने कहा कि जाहिर है मैंने सोचा था कि अलग वोट होगा लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे भारत और इस्राइल के बीच रिश्ते में बदलाव आएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जुलाई में यहूदी देश की यात्रा की थी और वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे।

नेतन्याहू ने कल एक कार्यक्रम में कहा कि मुझे लगता है कि हर कोई वह देख सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा मील का पत्थर थी। भारत की मेरी यात्रा अन्य मील का पत्थर है। यह पूछे जाने पर कि टैंक रोधी निर्देशित मिसाइलों को विकसित करने से संबंधित लाखों डॉलर का रक्षा सौदा रद्द करने के भारत के हालिया फैसले का क्या असर होगा।

इस पर इस्राइली नेता ने कहा कि मुझे लगता है कि इस सौदे पर ध्यान दिए बिना आप आर्थिक या अन्य संबंधों का विस्तार देखने जा रहे हैं। सभी मोर्चों पर रिश्तों को मजबूत करने पर जोर देते हुए नेतन्याहू ने उम्मीद जताते हुए कहा कि कुछ समय बाद मैं उम्मीद करता हूं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के वोट में बदलाव देखूंगा। इस्राइली प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत के साथ, लातिन अमेरिका और अफ्रीका में अन्य देशों के साथ संबंध सभी मोर्चों पर मजबूत हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर इसमें समय लगेगा।