कृषि विधेयकों के लोकसभा से पारित होने के बाद इन्हें राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां से पारित होने के बाद ये कानून में तब्दील हो जाएंगे। 245 सदस्यीय राज्यसभा में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि विपक्ष इसके विरोध में एकजुट होता है या फिर शिरोमणि अकाली दल के नाराज होने के बाद भी एनडीए इसे पारित कराने में कामयाब होगा।

दरअसल, इस समय सदन में सबसे मजबूत स्थिति में होने के बावजूद एनडीए विधेयक को पास कराने के बहुमत से 24 वोट दूर है।
राज्यसभा की मौजूदा 245 सीटों में से एक खाली है। ऐसे में बहुमत के लिए 123 वोटों की जरूरत होगी। दलगत स्थिति की बात करें तो राज्यसभा में यूपीए की 65, अकालियों की नाराजगी के बाद एनडीए के पास 99 और अन्य दलों के पास 77 सीटें हैं।
राज्यसभा में अध्यादेश को पास कराने के लिए एनडीए को 24 और सांसदों के मदद की जरूरत पड़ेगी। अब यहां यह देखना दिलचस्प होगा की विपक्ष एकजुट होता है या लोकसभा की तरह ही वॉकआउट करके यहां भी एनडीए की राह आसान करता है। 

किसी भी विपक्षी दल ने साझा लड़ाई की नहीं पेश की रणनीति
 इस विधेयक के विरोध में देशभर में किसान आंदोलन नाराज हैं। किसान संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। केंद्र सरकार के सहयोगी दल ने भी नाराजगी जताई है।

हालांकि, अभी तक कांग्रेस या वामपंथी किसी भी विपक्षी दल ने इतने बड़े मसले पर संगठित होकर किसानों की लड़ाई लडऩे को लेकर न तो कोई बयान दिया और न ही कोई साझा बैठक की। इससे साफ जाहिर है केंद्र सरकार अपने पांव खींचने को तैयार नहीं।

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