नई दिल्ली: पाकिस्‍तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई पर आरोप लगाया है कि वह देश के संसदीय चुनावों को प्रभावित कर रही है। उन्‍होंने पहली बार एक सीनियर आईएसआई ऑफिसर का नाम भी आरोप के साथ लिया है। उनका कहना है कि आईएसआई के सीनियर अधिकारी जनरल फैज हामिद इस साल चुनावों को प्रभावित करने वाली गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

नवाज शरीफ ने कहा कि उनके प्रत्याशियों को धमकाने के पीछे जनरल फैज हामिद और उनकी टीम का हाथ है। उनकी टीम प्रत्याशियों पर पार्टी को छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए भी दबाव बना रहे हैं। जनरल फैज आईएसआई में डीजी काउंटर इंटेलिजेंस हैं और उन्होंने 2017 में तेहरीक-ए-लब्बाइक के प्रदर्शनकारियों और सरकार के साथ बातचीत में प्रमुख भूमिका निभाई थी।

कौन हैं जनरल फैज हामिद
पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के डीजी आसिफ गफूर ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में फैज हामिद का जिक्र किया था। वो चुनावों में सेना की भूमिका के बारे में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जनरल हामिद और उनकी टीम ने देश में आंतकवाद को खत्म करने में महत्पपूर्ण भूमिका निभाई है।

निर्वाचन कानून 2017 में संशोधन के बाद तेहरीक-ए-लब्बाइक के कार्यकर्ता इस्लामाबाद में धरने पर बैठ गए और बीते साल पाकिस्तान की राजधानी को करीब तीन सप्ताह के लिए जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों से बातचीत की कोशिश नाकाम हो गई और इसके बाद सरकार ने सख्ती बरते हुए पुलिस कार्यवाही शुरू की। लेकिन ये कोशिश नाकामयाब रही। हालांकि इसके बाद में जनरल हामिद के हस्तक्षेप के बाद तेहरीक-ए-लब्बाइक ने प्रदर्शन को खत्म करने की घोषणा की।

उम्मीदवारों पर दबाव
नवाज शरीफ को हाल में भ्रष्‍टाचार के मामले में 10 वर्ष की कैद सुनाई गई है और उन पर चुनाव लड़ने की पाबंदी लगा दी है। पाकिस्तान में 25 जुलाई को चुनाव होने हैं। नवाज शरीफ ने कि फैज हामिद की टीम उनके उम्‍मीदवारों पर जीप का चुनाव चिह्न चुनने के लिए दबाव डाल रही है ताकि वो पार्टी छोड़कर निर्दलीय उम्‍मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ें।' उन्‍होंने यह भी कहा कि सेना के कुछ तत्‍व उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन)  को दोबारा सरकार में नहीं आने देना चाहते हैं। शरीफ ने पोलिंग स्‍टेशन पर सैनिकों को तैनात करने के आदेश को भी गलत बताया है। उनकी पार्टी इस फैसले का विरोध कर ही है।

सेना की सफाई
नवाज शरीफ के आरोपों पर सेना के प्रवक्‍ता जनरल आसिफ गफूर ने कहा है कि पाकिस्तान की सेना का किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और उनकी किसी के साथ कोई वफादारी नहीं है। उन्होंने कहा कि सेना अपनी ड्यूटी गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष तरीके से निभाएगी। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल चुनावों में सीधे नहीं शामिल हैं और उसकी भूमिका सिर्फ सहायक की है। चुनाव आयोग को जहां जरूरत होगी, वहां सेना मदद करेगी।