इंटरनेट डेस्क, नवरात्र के अंतिम या नौंवे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। सिद्धिदात्री की कृपा से मनुष्य सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त कर मोक्ष पाने मे सफल होता है। मां अपने भक्तों को आठ सिद्धियां (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्वये) प्रदान करती हैं, इसीलिए ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। नवरात्र के आखिरी दिन मां दुर्गा के इस अंतिम स्वरूप की आराधना करके नवरात्र के अनुष्ठान का समापन किया जाता है। मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह है। ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प हैं। इनकी कृपा से अनंत दुख रूप संसार से निर्लिप्त रहकर सारे सुखों का भोग करता हुआ मनुष्य मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।

मां सिद्धिदात्री की कृपा पाने के लिए इस मंत्र का जाप करें-

सिद्धगंधर्वयक्षादौर सुरैरमरै रवि।
सेव्यमाना सदाभूयात सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥“