जब नई शुरुआत के लिए प्रकृति स्वयं को बदलती है, तब नवरात्र होती है। ये मन से (मनसा), वचन से (वाचा) और कर्म से (कर्मणा) संकल्प लेने के दिन हैं। भास्कर आपको नौ दिनों के मन, वचन और कर्म के संकल्प बता रहा है। इसके बाद आप स्वयं को नई ऊर्जा से भरपूर पाएंगे। इसी में नवरात्र की सार्थकता है।

शैल पुत्री यानी कैलाश पर्वत की पुत्री। योग में इसका अर्थ है अपनी ऊर्जा का सर्वोच्च उपयोग करना। 

मनसा- आज मनन करें- अहं ब्रह्मास्मि। यानी मैं अपने पूरे सामर्थ्य और शक्ति से काम करूं तो कुछ भी हासिल कर सकता हूं।

वाचा- आज अपने सबसे नजदीकी लाेगों को बताइए कि उनमें सबसे बड़ी खूबी क्या है। उनकी तारीफ कीजिए।

कर्मणा- आज वह काम शुरू कीजिए, जिससे सबसे ज्यादा डर लगता है और जिसके कारण तरक्की रुकी हुई है।