इंटरनेट डेस्क, मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को पंजाब के अमृतसर में हुआ। इन्हे  दुनिया रफ़ी या रफ़ी साहब के नाम से बुलाती है, हिन्दी सिनेमा के श्रेष्ठतम पार्श्व गायकों में से एक थे। अपनी आवाज की मधुरता और परास की अधिकता के लिए इन्होंने अपने समकालीन गायकों के बीच अलग पहचान बनाई। इन्हें शहंशाह-ए-तरन्नुम भी कहा जाता था। मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ ने अपने आगामी दिनों में कई गायकों को प्रेरित किया। मोहम्मद रफी या जिन्हें दुनिया रफी साहब की आज 93वीं जयंती  है। इस मौके पर गूगल ने एक खास डूडल बनाकर उनको ट्रिब्यूट दिया है।

साल 1949 में दुलारी फिल्म के गाने 'सुहानी रात ढल चुकी' के जरिए रफी साहब को पहचान मिली थी। उसके बाद मोहम्‍मद रफी ने तकरीबन 26 हजार गाने गाए थे। कहा जाता है 'बाबुल की दुआएं लेती जा' गीत को गाते वक्‍त रफी कई बार रोए। इसके पीछे वजह थी कि इस गाने की रिकॉर्डिंग से एक दिन पहले उनकी बेटी की सगाई हुई थी। जिसके चलते रफी साहब काफी भावुक थे। इस गीत के लिए उन्‍हें 'नेशनल अवॉर्ड' मिला।

रफी साहब को गाने की प्रेरणा उनके घर के आस पास घूमने वाले एक फकीर से मिली थी। रफी साहब के पिता की लाहौर में एक नाई की दुकान थी और रफी साहब का ज्यादातर वक्त उसी दुकान पर गुजरता था, जहां वह गाने गाया करते थे और लोग उनकी आवाज को काफी पसंद करते थे। रफी साहब को 6 फिल्मफेयर और 1 नेशनल अवार्ड मिला. भारत सरकार ने उन्‍हें 'पद्म श्री' सम्मान से सम्मानित किया था।

रफी ने कई भारतीय भाषाओं में गीत गाए, जैसे- कोंकणी, असामी, पंजाबी, मराठी, उड़िया, बंगाली और भोजपुरी इसके अलावा रफी साहब ने पारसी, डच, स्पेनिश और इंग्लिश में भी गीत गाए। जब मोहम्मद रफी निधन हुआ, तो मुंबई में खूब बारिश हुई. लोगों ने कहा कि उनकी मौत पर मां सरस्‍वती थी रो रही थीं। उस दिन मुंबई में जोरों की बारिश के बाद भी रफी साहब की अंतिम यात्रा में कम से कम 10000 लोग सड़कों पर थे।