जयपुर बीजेपी के चाणक्य अमित शाह सक्रिय हो गए हैं और आने वाले दिनों में तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की संसदीय सीटों पर कमान संभालने वाले अमित शाह राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए भी खास रणनीति पर भी काम कर रहे हैं। यही कारण है कि इस साल 21 जुलाई को दौरा करने के बाद शाह 11 सितम्बर को एक बार फिर राजस्थान आए और अब 16 से 18 सितम्बर को वह फिर प्रदेश के छह जिलों के प्रवास पर आ रहे हैं।

अगले साल अप्रैल, मई में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले इस साल नम्बर, दिसम्बर में चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। मिशन 2019 की राह में बीजेपी साल 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव को भी महत्वपूर्ण मान रही है। इस लिस्ट में पार्टी ने राजस्थान को भी सबसे ऊपर रखा है। बीजेपी की नजर में राजस्थान की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपना फोकस राजस्थान पर कर दिया है। बीजेपी के प्रवक्ता मुकेश पारीक कहते हैं कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे संगठन के साथ ही चुनावी तैयारियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, अमित शाह के दौरों से कार्यकर्ताओं में नई जान आई है।

अमित शाह की नजर में राजस्थान की अहमियत इससे भी समझी जा सकती है कि पहले कुछ सभाओं तक उनके दौरों को सीमित करने के प्लान में बड़ा बदलाव हुआ। अब प्रदेश के हर संभाग में अमित शाह जाएंगे और शक्ति केन्द्र संयोजकों की बैठकें करेंगे। इसी कड़ी में 11 सितम्बर का दौरा हुआ था। वहीं, अब 16 से 18 सितम्बर को एक बार फिर अमित शाह छह जिलों के दौरे पर आ रहे हैं। इनमें से जोधपुर, पाली, नागौर, उदयपुर और भीलवाड़ा में वे कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। जबकि राजसमन्द में श्रीनाथजी के मन्दिर के भी दर्शन करेंगे।

अमित शाह के दौरे अब इस बात का संकेत देने लगे हैं कि पार्टी अपने मिशन 180 प्लस के लिए कितनी गम्भीरता से जुटने लगी है। इसका एक संकेत यह भी है कि पिछले साल 21 जुलाई को तीन दिन के प्रवास पर अजेय बीजेपी का नारा देने वाले अमित शाह इस साल भी 21 जुलाई को एक दिन के दौरे पर राजस्थान आए थे। इस दौरान भी उन्होंने पार्टी को मजबूत करने के लिए विस्तारकों के साथ ही साइबर योद्धाओं, सांसदों और विधायकों को भी जीत का मन्त्र दिया था। पार्टी की तरफफ से यह कोशिश इसलिए भी की जा रही है क्योंकि बीजेपी मान रही है कि 2019 का रास्ता 2018 के विधानसभा चुनाव से ही होकर जाएगा।