लखनऊ: लोकसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है.सपा-बसपा ने गठबंधन का ऐलान कर दिया है.हालांकि किन शर्तों पर दोनों पार्टियां मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ेंगी ये अभी तक तय नहीं हुआ है.सूत्रों के हवाले से खबर है कि 2019 लोकसभा चुनाव बसपा प्रमुख मायावती भी लड़ेंगी.सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मायावती अपनी पारंपरिक सीट अंबेडकर नगर (पूर्व में अकबरपुर) से चुनाव लड़ सकती हैं.अकबरपुर संसदीय क्षेत्र बसपा का गढ़ माना जाता है.इस सीट से मायावती पहले भी सांसद रह चुकी हैं. ऐसी भी खबर है कि मायावती अकबरपुर के अलावा बिजनौर सीट पर भी विचार कर रही हैं।

मायावती 1989 में पहली बार बिजनौर सीट से सांसद चुनी गईं. पहली बार 1994 में राज्यसभा सांसद बनीं.उसके बाद वो 1998 और 1999 लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की. 1999 और 2004 लोकसभा चुनाव मायावती अकबरपुर सीट से लड़ीं और जीत दर्ज की.मायावती आखिरी बार 2004 में चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंची थीं. उसके बाद वो 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश की सीएम रहीं.इसके अलावा वो लगातार राज्यसभा सदस्य रहीं.पिछले साल मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था. 14 साल बाद फिर से उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होने की वजह से 2017 में सपा और बसपा दोनों यूपी की सत्ता से दूर हो गई. उपचुनाव के दौरान दोनों पार्टियां एकजुट हुई, तो बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. सीएम योगी के सत्ता में आने के बाद उत्तर प्रदेश में तीन लोकसभा सीट और एक विधानसभा सीट पर बीजेपी की हार हुई है. सपा-बसपा गठबंधन ने मिलकर फूलपुर, गोरखपुर, कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की है. सपा-बसपा गठबंधन के जनाधार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीएम योगी (गोरखपुर) और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (फूलपुर) अपने लोकसभा सीट तक को नहीं बचा पाए।

अखिलेश यादव पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वे कन्नौज सीट से चुनाव लड़ेंगे.मुलायम सिंह यादव मैनपुरी सीट से चुनाव लड़ेंगे. कन्नौज सीट से वर्तमान में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव सांसद हैं. वो इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगी.मुलायम सिंह यादव वर्तमान में आजमगढ़ सीट से सांसद हैं. अखिलेश बार-बार कहते रहे हैं कि 2019 में सपा और बसपा मिलकर चुनाव लड़ेगी यह तय है.सीटों का बंटवारा सही वक्त पर किया जाएगा।

कॉन्क्लेव में अखिलेश यादव ने कहा था कि मैं पीएम की रेस में तो नहीं हूं लेकिन उस प्रदेश से हूं जहां से दिल्ली की सत्ता का रास्त होकर गुजरता है. दूसरी तरफ मायावती की पीएम बनने की चाहत जगजाहिर है.अगर केवल यूपी में गठबंधन की बात करें तो कांग्रेस के सामने मजबूरी ये है कि वह गठबंधन में जाए या नहीं जाए.क्योंकि सपा और बसपा की तरफ से अभी तक उसे बहुत ज्यादा तवज्जो नहीं मिली है।